(बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम) प्रिय पाठकों,अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! आज की इस पोस्ट में मानव जीवन के चैथे दौर ‘‘निकाह के बाद से अन्तिम समय तक’’ के सम्बन्ध में छः शिक्षाओं का उल्लेख किया गया है जिसमें आप लोगों को इस बात से अवगत कराया जा रहा है कि पत्नी को चाहिए कि वे अपने पति की जिन्सी भावनाओं का सम्मान करे ताकि पति अपने जिन्सी भावनाओं के प्रति बिगड़ने और भटकने से बच सके, और जिन्सी भेद खोलने की मनाही एवं रिश्तेदारों से पर्दा करने का उल्लेख भी किया गया है। अल्लाह तआला हम सभी को लिखने और पढ़ने से ज़्यादा अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाये, आमीन! चैथा दौर – निकाह के बाद से अन्तिम समय तक निकाह के बाद जिन्सी दृष्टि से इन्सान के अन्दर सुकून, शान्ति और सन्तोष की स्थिति पैदा हो जानी चाहिए फिर भी इसका दारोमदार पति पत्नी के अपासी रवैयों पर है इसलिए इस अवसर पर भी इस्लाम दोनों पक्षों की जिन्सी भावनाओं को बिगड़ने व भटकने से बचाने के लिए पूरी-पूरी रहनुमाई करता है। निकाह के बाद पति-पत्नी के लिए इस्लामी शिक्षाऐं इस प्रकार हैं- 1. पति की जिन्सी भावनाओं का सम्मान 2. चार शादियों की इजाज़त 3. पति के ...
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