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अगस्त, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Virtue of Muharram Part 05 : फ़ुज़ूल ख़र्ची बेहूदा हरकत

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन वस्सलातु वस्सलामु अला सय्यिदिल मुर्सलीन वल आक़िबतु लिल मुत्तक़ीन, अम्मा बाद! प्रिय पाठकों, अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! इस लेख में कुछ ज़रूरी सच्ची बातें अनमोल बातें माहे मुहर्रम में होने वाली फ़ुज़ूल ख़र्ची के बारे में बताया गया है। चुनांचे, आप हज़रात से गुज़ारिश है कि इस लेख को पूरा ज़रूर पढ़ें, और दूसरों को भी पढ़कर सुनाऐं, अल्लाह तआला मुझे और आप सभी हज़रात को शिर्क व बिदअत और ख़ुराफातों से बचने की तौफ़ीक़ अता फरमाये, आमीन! जैसा कि अल्लाह तआला ने दूसरी जगह इरशाद फरमाया हैः اَمۡ لَہُمۡ شُرَکٰٓؤُا شَرَعُوۡا لَہُمۡ مِّنَ الدِّیۡنِ مَا لَمۡ یَاۡذَنۡۢ بِہِ اللّٰہُ ‘‘अम लहुम शुराकाऊ शरऊ लहुम मिनद् दीनि मालम यअज़न बिल्लाहु’’ (सूरह शूरा : 21) ‘‘क्या उनके ऐसे शरीक हैं, कि उन्होंने उनके वास्ते दीन की ऐसी राह निकाली है, जिस का हुक्म अल्लाह तआला ने नहीं दिया।’’ पस ऐ मेरे अज़ीज़ो और बुज़ुर्गो! अल्लाह तआला के लिए आँखें खोलो, और होश दुरूस्त करो, और ऐसा जहन्नमी बातों व कामों से तौबा करो वरना तुम्हारे लिए वही वईद तैयार है जो अल्लाह...

Virtue of Muharram Part 04 : बे सनद और लायानी बातें

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन वस्सलातु वस्सलामु अला सय्यिदिल मुर्सलीन वल आक़िबतु लिल मुत्तक़ीन, अम्मा बाद! प्रिय पाठकों, अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! इस लेख में कुछ ज़रूरी सच्ची बातें अनमोल बातें नज़्म की शक्ल में पेश की जा रही हैं, जिसमें सूरह तौबा की आयत नम्बर 36 की तफ़सीर और जनाब मौलाना हाली मरहूम का फरमान नज़्म की शक्ल में आप मुलाहज़ा फरमायेंगे। अतः आप हज़रात से गुज़ारिश है कि इस बे सनद और लायानी बातें लेख को पूरा ज़रूर पढ़ें, और दूसरों को भी पढ़कर सुनाऐं, अल्लाह तआला मुझे और आप सभी हज़रात को शिर्क व बिदअत और ख़ुराफातों से बचने की तौफ़ीक़ अता फरमाये, आमीन! मौलाना हाली मरहूम ने क्या ही ख़ूब फरमाया हैः करे ग़ैर गर बुत की पूजा तो काफिर जो ठहराऐ बेटा, ख़ुदा का तो काफिर झुके आग पर बहरे सजदा तो काफिर कवाकिब में माने करिश्मा तो काफिर मगर मोमिनों पर कुशादा हैं राहें परिस्तिश करें शौक़ से जिसकी चाहें नबी को जो चाहें अल्लाह कर दिखाऐं इमामों का रूतबा नबी से बढ़ाऐं मज़ारों पे दिन-रात नज़रें चढ़ाऐं शहीदों से जा जाके माँगें दुआऐं न तौहीद में कुछ ख़लल इससे आ...

Virtue of Muharram Part 03 : बुत पूजा तो काफिर ढाँचा पूजा मुसलमान

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन वस्सलातु वस्सलामु अला सय्यिदिल मुर्सलीन वल आक़िबतु लिल मुत्तक़ीन, अम्मा बाद! अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! मेरे इस्लामी भाईयों, आज माहे मुहर्रम की फ़ज़ीलत Part 03 के बारे में कुछ ज़रूरी सच्ची बातें अनमोल बातें पेश कर रहा हूँ, जिसमें जिसमें मुहर्ररम के ताज़िया का इतिहास (History of Taziya of Muharram) और इसके (Inventors of Muharram Taziya) मुहर्ररम के ताज़िये को ईजाद करने वालों के बारे में बताया गया है एवं इसके अतिरिक्त मुहर्रम के ताज़िया (Taziya of Muharram) में जो ढांचे (Structure) की पूजा की जाती है और दशहरा यानी रामलीला (Dashehra Ramlila) में जो बुत (Statue) की पूजा की जाती है तो इन्हीं दोनों में फ़र्क़ अंतर (Difference) भी बताया गया है और क़ुरआन मजीद से मुहर्रम के ताज़िया (Taziya of Muharram) की तरदीद की गयी है. अतः आप हज़रात से गुज़ारिश है कि इस लेख को पूरा ज़रूर पढ़ें, और दूसरों को भी पढ़कर सुनाऐं, अल्लाह तआला मुझे और आप सभी हज़रात को अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाये, आमीन! Now, Let’s start... बुत की पूजा तो काफिर ढाँचे की पूजा...

Virtue of Muharram Part 02 : एक वहम ताज़िया और दशहरा

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन वस्सलातु वस्सलामु अला सय्यिदिल मुर्सलीन वल आक़िबतु लिल मुत्तक़ीन, अम्मा बाद! अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! मेरे इस्लामी भाईयों, आज मैं माहे मुहर्रम की फ़ज़ीलत भाग 02 के बारे में कुछ ज़रूरी सच्ची बातें अनमोल बातें पेश कर रहा हूँ, जिसमें ताज़िया की तारीफ (परिभाषा) Definition of Taziya, मुहर्ररम के ताज़िया और दशहरा (रामलीला) (difference between Taziya of Muharram and Dashehra (Ramlila) में फ़र्क़ बताया गया है। मुहर्ररम में की जाने वाली ख़ुराफ़ात का उल्लेख भी किया गया है अतः आप हज़रात से गुज़ारिश है कि इस लेख को पूरा ज़रूर पढ़ें, और दूसरों को भी पढ़कर सुनाऐं, अल्लाह तआला मुझे और आप सभी हज़रात को शिर्क व बिदअत और ख़ुराफातों से बचने की तौफ़ीक़ अता फरमाये, आमीन! Now, Let’s start... एक वहम ताज़िया और दशहरा (1) ताज़िया की तारीफ (परिभाषा) (Definition of Taziya) ताज़िया के लुग़वी मायनी किसी मुसीबत ज़दा को तल्क़ीने सब्र करने और तस्कीन देने के हैं, चूँकि किसी का मरना भी उस के वुरसा के लिए एक सख़्त मुसीबत और रंज व ग़म का सबब है, लिहाज़ा ...

Virtue of Muharram Part 01 : माहे मुहर्रम की फज़ीलत व बरकत

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन वस्सलातु वस्सलामु अला सय्यिदिल मुर्सलीन वल आक़िबतु लिल मुत्तक़ीन, अम्मा बाद! अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! मेरे इस्लामी भाईयों आज मैं माहे मुहर्रम Muharram के बारे में कुछ ज़रूरी सच्ची बातें अनमोल बातें पेश कर रहा हूँ, जिसमें मुहर्रमुल ह़राम Muharram का ख़ुलासा किया गया है इसके साथ साथ मुहर्रम Muharram की फ़ज़ीलें व बरकतों Virtues and Blessings के बारे में समझया गया है और इस माहे मुहर्रम Virtue of Muharram में की जाने वाली बिदअतों Bidat के बारे में भी बताया गया है। अतः आप हज़रात से गुज़ारिश है कि इस लेख को पूरा ज़रूर पढ़ें, और दूसरों को भी पढ़कर सुनाऐं, अल्लाह तआला मुझे और आप सभी हज़रात को अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाये, आमीन! Now, Let’s start Virtues and Blessings of the month of Muharram. Virtues and Blessings माहे मुहर्रम की फज़ीलत व बरकत क़ुरआन में अल्लाह तआला का फ़रमान है कि ‘‘महीनों की गिनती अल्लाह के नज़दीक किताबुल्लाह में बारह है उसी वक़्त से जब से अल्लाह तआला ने आसमान व ज़मीन को पैदा फरमाया, इनमें चार हुरमत व अदब के ह...

Islamic Marriage Part 04 : औरतों को मर्दों के बराबर अधिकार या धोखा

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Islamic Marriage Part 04 : अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! ये पोस्ट पश्चिमी जीवन व्यवस्था (Western Living System) पर आधारित है जिसमें औरतों को मर्दों के बराबर अधिकारों (Women Rights equal to men or deception) के सम्बन्ध में जानकारी दी जा रही है और आपको औरतों के अधिकारों (Women Rights) के बारे में बताया जा रहा है कि पश्चिम में औरतों के अधिकार कितने प्रतिशत हैं और भारत में औरतों के अधिकार (Women Rights) कितने प्रतिशत हैं जबकि इस्लाम ने हमें औरतों के अधिकारों को मर्दों के बराबर बताया है जिस प्रकार मर्दों को अधिकार इस्लाम ने दिये हैं ठीक इसी प्रकार औरतों को अधिकार (Women Rights) भी इस्लाम ने बताए हैं अतः अब हम इस पोस्ट में जानेंगे कि किन किन देशों में कितने प्रतिशत औरतों के अधिकार (Women Rights) हैं। चुनांचे आप लोग इस पोस्ट को पूरा ज़रूर पढ़ लें ताकि आप ये जान सकें कि इस्लाम में औरतों को कितना अधिकार (Women Rights in Islam) है। अब हम आपकी खि़दमत में पेश कर रहे हैं निकाह के मसाइल भाग 4 Islamic Marriage Part 04, इसका अध्ययन करना आपके लिए अत्यन्त आवश्यक है। इंशा अल्लाह आपको इसमें बहुत ह...

Islamic Marriage Part 03 : पश्चिमी जीवन व्यवस्था : Freedom of Women

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Islamic Marriage Part 03 : Nikah Ke Masail Part 03: अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! इस पोस्ट में आप पढ़ेंगे पश्चिमी जीवन व्यवस्था (Western Living System) के बारे में, जिसमें आप जानेंगे कि किस तरह से पश्चिमी जीवन व्यवस्था ने महिला की आज़ादी (Women’s Freedom) को लेकर अभियान चलाए जिसके नतीजे में महिला की आज़ादी (Women’s Freedom) ने शर्म व लज्जा को रौंद कर रख दिया है। जबकि इस्लामी जीवन व्यवस्था ने महिला की आज़ादी (Women’s Freedom) को इस तरह से पेश नहीं किया जिस तरह से पश्चिमी जीवन व्यवस्था ने महिला की आज़ादी (Women’s Freedom) को पेश किया है जिसका परिणाम आज हम अपने घरों में देख रहे हैं। काश महिला की आज़ादी (Women’s Freedom) को लेकर हम सतर्क हो जाते तो हमारे मुल्क व समाज में महिला की आज़ादी (Women’s Freedom) को लेकर इतना शोर नहीं होता और आज हमारी माँ बहिनें सरे आज नंगनाच नहीं नाचतीं जैसा कि बाज़ारों में हमें देखने को मिलता है परन्तु इस महिला की आज़ादी ने सारी हदें पार कर दी हैं। हमें बस अफ़सोस के अलावा कुछ भी नज़र नहीं आता है। अगर हम इस्लामी क़ानून को अपना लेंगे तो यक़ीनन महिला की आज़ादी का नारा म...

Islamic Marriage Part 02 : सामाजिक व्यवस्था को बदलने की कोशिश

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Islamic Marriage Part 02 : Nikah Ke Masail Part 02: अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! इस पोस्ट में आप पढ़ेंगे इस्लामी सामाजिक व्यवस्था को बदलने का नामाक कोशिश (Trying to change the Islamic Social System). ये पोस्ट आपके लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं क्यों कि इसमें सोशल सिस्टम (Social System) के बारे में बताया गया है वैसे तो आप अच्छी तरह से सोशल सिस्टम (Social System) के बारे में जानते ही होंगे परन्तु फिर भी हम आपको इस सोशल सिस्टम (Social System) से आगाह कर रहे हैं क्यों ये सोशल सिस्टम इस्लामिक सोशल सिस्टम (Islamic Social System) है। जब तक आप इस इस्लामिक सोशल सिस्टम (Islamic Social system) को नहीं समझेंगे तब तक आप निकाह के मसाइल (Issues of Marriage) को भी नहीं सकझ पायेंगे। इंशा अल्लाह आपको इसमें बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। आप हज़रात से गुज़ारिश है कि इस पोस्ट को दूसरों तक पहुँचाने में हमारी सहायता ज़रूर करें ताकि और लोग भी इससे लाभ उठा सकें। अल्लाह तआला हम सभी को सही शिक्षा प्राप्त करने और उन पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए, आमीन! Now let’s start Islamic Marriage Part 02 : Tr...

Islamic Marriage Part 01 : बेटा औरत का ग़ुलाम और बहु फूहड़

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Islamic Marriage Part 01 : प्रिय पाठकों, अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू!अल-हम्दु लिल्लाह! जैसा कि आप सभी प्रिय पाठकों को मालूम है कि ‘‘अल-इस्लाम फाउण्डेशन – एआईएफ ट्रस्ट’’ एक इस्लामिक ट्रस्ट है। इस ट्रस्ट के माध्यम से AIF TRUST नामक आनलाइन इस्लामिक ब्लाॅग और iTrust TV नाकम आनलाइन चैनल का संचालन किया जा रहा है, इनके माध्यम से अल्लाह की तौफ़ीक़ से दीनी कामों को अंजाम दिया जा रहा है। इन दोनों आनलाइन सेवाओं के माध्यम से क़ुरआन व सुन्नत की “सच्ची बातें अनमोल बातें” और इस्लामिक इतिहास हम आप तक पहुँचा रहे हैं आप हज़रात से गुज़ारिश है कि दीने हक़ की ख़ातिर आप हमारा तआवुन करें, और दीने इस्लाम की बातें दूसरों तक पहुँचाने में हमारा साथ ज़रूर दें। दीने शरीअत का इल्म दूसरों तक पहुँचाना बहुत बड़ी नेकी और अज्र व सवाब का काम है और ये सदक़ा-ए-जारिया है। आप हज़रात इस ब्लाॅग और चैनल को ख़ुद सब्स्क्राइब, करें और इसके बारे में दूसरों को भी बताऐं ताकि वो भी इस्लामी जानकारी से मालामाल हो सकें। चलिए, अब आपकी खि़दमत में पेश है – Islamic Marriage Part 01 : बेटा औरत का ग़ुलाम और बहु फूहड़; Now let’s star...

Sunehri Kirnen Story 01 : चाँद मेरे हुजरे में : The Moon In My Room

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 Sunehri Kirnen Story 01 : इस पोस्ट में हज़रत आईशा रज़ियल्लाहु अन्हा का एक बहुत ही नसीहत आमूज़ क़िस्सा सुनाया गया है। जिसका नाम है चाँद मेरे हुजरे में The Moon In My Room. जिसमें हज़रत आईशा रज़ियल्लाहु अन्हा का एक ख़्याब बयान किया गया है। ये क़िस्सा बहुत ही अच्छा है इसे ज़रूर पढ़ें। Sunehri Kirnen Story 01 – बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, अर्रहमानिर्रहीन, मालिकि यऊ मिद्दीन, इय्याकः नअबुदु व इय्याकः नस्तईन, इह्दिनस्सिरातल मुस्तक़ीम, वस्सलातु वस्सलामु अला रसूलिहिल अमीन वल आक़िबतु लिल मुत्तक़ीन, अम्मा बाद! सब तारीफ अल्लाह के लिए है जो सारे जहानों का रब है और दुरूद व सलाम नाज़िल हों आखि़री पैग़म्बर जनाब मुहम्मद रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलईहि वसल्लम पर।  अल्लाहुम्मा सल्लि व सल्लिम व बारिक अलैह! चाँद मेरे हुजरे में मुअत्ता इमाम मालिक में यहया बिन सईद से रिवायत है कि हज़रत आईशा रजिअल्लाहु अन्हा ने इरशाद फरमायाः  رأيت ثلاثة أقمار سقطن في حجرتي، فوصفت رؤياي على أبي بكرالصديق ‘‘रअईतु सलासता अक़्मारिन सक़त्ना फी हुज्रती फउ सफ्तु रूअयायः अला अबी बक़रिन सिद्दीक़’...

Umar Bin Khattab (RA) : क़ुबूले इस्लाम और मुश्किलात बर्दाश्त : Part 06

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम اَلحَمدُ للہِ رَبِّ العٰلَمِینَ وَالصَّلَاۃُ وَالسَّلَامُ عَلٰی رَسُولِہِ الاَمِینِ وَالعَاقِبَۃُ لِلمُتَّقِینَ، اَمَّا بَعدُ हम्दो सना सिर्फ अल्लाह तआला के लिए हैं जो सारे जहानों का रब है और दुरूद व सलाम नाज़िल हों उसके सारे अम्बिया अलईहिमुस्सलाम पर, बिल ख़ुसूस उसके आखि़री पैग़म्बर जनाब मुहम्मद रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलईहि वसल्लम पर और उनके आल व असहाब, उम्मुल मुमिनात और अज़वाजे मुतह्हरात पर और अल्लाह तआला रहमो करम फरमाऐ हम सब पर, आमीन! “अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिउं व अला आलि मुहम्मद कमा सल्लईता अला इब्राहीमः व अला आलि इब्राहीमः इन्नकः हमीदुम्मजीद अल्लाहुम्मः बारिक अला मुहम्मदिउं व अला आलि मुहम्मद कमा बारकता अला इब्राहीमः व अला आलि इब्राहीमः इन्नमा हमीदुम्मजीद” (3) जब ख़ब्बाब रज़िअल्लाहु अन्हु ने ये वाक़िया सुना तो घर से निकले। वो छुपे हुए थे। और कहाः ऐ उमर! ख़ुश हो जाओ, मुझे उम्मीद है कि आपके हक़ में बरोज़ दो शम्बा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलइहि वसल्लम की ये दुआ सबक़त कर चुकी है- ‘‘ऐ अल्लाह! अबू जहल बिन हिशाम या उमर बिन ख़त्ताब दोनों में से जो तेरे नज़दीक ज़्य...

Asli Ahle Sunnat Kaun? Part 11 : निजात का दुरूस्त रास्ता सुन्नते रसूल या हनफियत? : असली अहले सुन्नत कौन?

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Asli Ahle Sunnat Kaun Part 11 : मुहक़्क़िक़ Researcher के क़लम से   ये एक हनफी और मुहम्मदी का बहुत ही दिलचस्प मुबाहिसा है इसमें Ahle Sunnat के विषय पर Interesting Discussion किया गया है और मज़हब के बारे में ऐसी बहुत सी बातों के जवाबात Ahle Sunnat के संबंध में ज़ेरे बहस आये हैं. आखि़रकार असली अहले (Ahle Sunnat) सुन्नत कौऩ है? ये सवालात अक्सर ज़ेहनों में पैदा होते रहते है। अतः हम आपको Ahle Sunnat पर आधारित सवालात के जवाबात इस पोस्ट के माध्यम से दे रहे हैं ,  तो आइए अब जानते हैं कि असली अहले सुन्नत Ahle Sunnat कौन हैं? (बिस्मिल्लिहिर्रहमानिर्रहमी) अज़ीज़ पाठकों! अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाह वबरकातुहू!  लेख पढ़ने के लिए मैं आप हज़रात का शुक्रिया अदा करता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि आपको हमारे लेख ज़रूर पसन्द आ रहे होंगे।  अल-हम्दु लिल्लाह!  हज़रात आर्टिकल ‘‘असली अहले सुन्नत कौन?’’ के दस भाग आपकी खि़दमत में पेश किये जा चुके हैं और अब ये ग्यारहवां और आखि़री भाग आपकी खि़दमत में पेश किया जा रहा है, इस भाग को पढ़ने के बाद आप ख़ुद तय करें कि निजात मतलब मरने के बाद कामया...