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कुरआन हकीम के 100 संक्षिप्त संदेश | जीवन बदलने वाली कुरआनी शिक्षाएँ

  कुरआन मजीद केवल तिलावत करने की किताब नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए हिदायत, रहमत, इंसाफ, अच्छे अख़लाक और कामयाब ज़िंदगी का मार्गदर्शन है। कुरआन हमें अल्लाह तआला की इबादत के साथ-साथ माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने, सच्चाई अपनाने, इंसाफ करने, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने, यतीमों के अधिकारों की रक्षा करने, बुराई से बचने और लोगों के साथ अच्छे अख़लाक से पेश आने की शिक्षा देता है। नीचे कुरआन मजीद की विभिन्न शिक्षाओं और आयतों के संक्षिप्त भावार्थ के रूप में 100 संदेश प्रस्तुत किए जा रहे हैं। कुरआन हकीम के 100 संक्षिप्त संदेश 1. बातचीत के दौरान बदतमीज़ी न किया करो। 2. अपने गुस्से पर काबू रखो। 3. दूसरों के साथ भलाई करो। 4. तकब्बुर और घमंड न करो। 5. दूसरों की गलतियों को माफ कर दिया करो। 6. लोगों से नरमी और अच्छे अंदाज़ में बात करो। 7. अपनी आवाज़ नीची रखो। 8. किसी का मज़ाक न उड़ाओ। 9. माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो। 10. माता-पिता को 'उफ़' तक न कहो और उनसे सम्मान से बात करो। 11. किसी के घर या निजी स्थान में बिना अनुमति प्रवेश न करो। 12. लेन-देन और कर्ज़ के माम...

उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा: ईमान, सब्र और एक महान माँ की कहानी

उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा इस्लामी इतिहास की उन महान महिलाओं में से हैं, जिनकी ज़िंदगी ईमान, हिकमत, सब्र और बेहतरीन तर्बियत की मिसाल है। उनकी ज़िंदगी में हमें यह सीख मिलती है कि एक महिला अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहते हुए अपने परिवार और आने वाली नस्लों के लिए कितना बड़ा किरदार अदा कर सकती है। उनकी ज़िंदगी का एक मशहूर वाक़िया उनके निकाह से जुड़ा हुआ है। जब अबू तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु ने उनके लिए निकाह का पैग़ाम भेजा, उस समय वह मुसलमान नहीं थे। रिश्ता अच्छा था और अबू तल्हा एक बाक़रदार शख़्स थे, लेकिन उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा के लिए सबसे अहम सवाल था: क्या हम दोनों का रास्ता एक है? उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा का मेहर क्या था? उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा ने अबू तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु से कहा: “मैं मुसलमान हूँ और तुम मुसलमान नहीं हो, इसलिए मेरे लिए तुमसे निकाह जायज़ नहीं। अगर तुम इस्लाम क़ुबूल कर लो तो वही मेरा मेहर होगा।” उन्होंने न सोना माँगा और न चाँदी। उनके लिए दुनिया की दौलत से बढ़कर ईमान था। चुनाँचे अबू तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु इस्लाम ले आए और यही उनका ...

Guidelines for Speech and Quran Recitation: तक़रीर और तिलावत में गाने की शैली से दूरी और आवाज में मिठास पैदा करने का हुक्म

Guidelines for Speech and Quran Recitation   **बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम** पैग़ंबर मुहम्मद (ﷺ) ने फरमाया:  "اقرؤوا القرآن ‌بلحون ‌العرب وأصواتها وإياكم ولحون أهل العشق ولحون أهل الكتابين" (क़ुरआन को अरबी के लहजे और आवाज़ में पढ़ो और गानों की शैली या यहूद-नासारा के लहजे से बचो।) (लेखक- शकील अहमद अब्दुल हई) तक़रीर और तिलावत में ऐसा तरन्नुम जो गाने का तरीक़ा और रूप अपना ले, वह चाहे तक़रीर हो, शेर-ओ-शायरी या क़ुरआन मजीद की तिलावत हो, ममनू और हराम है। लेकिन अगर क़ारी, मुक़र्रिर और शायर की आवाज़ तसन्नुअत और बनावट से दूर अपने असली स्वर के बहाव में मिठास पैदा करती है, तो यह चीज़ शरीअत में मक़्सूद है। क़ुरआन मजीद की तिलावत के वक़्त लह्न और तरतील का ख़्याल रखना, हर अल्फ़ाज़ को उसका हक़ देना, जिससे दिलों में बलीग़ असर पैदा हो, शरइ तौर पर मक़्सूद है। अपनी आवाज़ में ख़ूबसूरती पैदा करना, जो ममनूअत की हद को पार न करे, बल्कि हुस्न-ए-स्वर पैदा हो, खुशूअ और ख़ुजूअ, तदब्बुर-फ़िल-क़ुरआन, रग़बत-ए-समाअत और हुस्न-ए-फहम के इसबाब में से है। क़ुरआन को ऐसी आवाज़ में पढ़ना, जिससे दिलों में लज़त और चाशनी महसूस हो (...

मगर दीन वही मंजुर है जो आलिम ने बताया है भले ही वो गलत हो

हर एक शख्स अपनी ज़रूरत का सामान खरीदने के लिए 10 (दस) दुकानों में जाकर खोजता  है मगर दीन वही मंज़ूर है जो आलिम ने बताया है भले ही वो गलत हो यही हाल यहूदी और ईसाइयों का था  ◆उन्होंने अल्लाह को छोड़कर अपने अपने उलेमा और दरवेशों को रब्ब बना लिया है ( क़ुरआन : सुरह: तौबा सुरह: नं0 9 आयत नं0 31) इस आयत की तफ़्सीर  में हदीस ◆इस आयत को सुनकर  इब्ने हातिम र.अ. ने नबी ﷺ से फरमाया यहूदी और नसारा (ईसाई) ने अपने उलेमा की कभी इबादत नही की फिर ये क्यों कहा गया के उन्होंने अपने उलेमा को रब्ब बना लिया ? नबी ﷺ ने कहा उनके उलेमा ने जिस चीज़ को हलाल करार दिया उसको उन्होंने हलाल ,और जिस चीज़ को हराम कर दिया,उसको हराम ही समझा यही इनकी इबादत है. ( तिर्मिज़ी हदीस नं0 3095) (यानि किसी चीज को हलाल और हराम करने का अधिकार सिर्फ अल्लाह को है) आज उम्मत यकीनन यहूदी नसारा ( ईसाइ ) की नक़्शे कदम पर चल रही है इसकी दलील ये हदीस है  ◆नबी ﷺ फरमाया तुम पहले की उम्मतों की पैरवी करोगी सहाबी रसूल ने कहा इससे मुराद कही यहूदी और नसारा ( ईसाई ) तो नही नबी ﷺ कहा बिल्कुल (सही बुखारी हदीस नं07320) आज ...

Special on Ambedkar Jayanti: समानता एवं बराबरी

अम्बेडकर जयंती पर विशेष.... सर्वशक्तिमान अल्लाह की नज़र में सभी लोग समान हैं, भले ही वे सभी एक-दूसरे के समान न हों। रूप-रंग, धन-संपदा, महत्वाकांक्षाएँ, योग्यताएँ इत्यादि आदि में भिन्नताएँ होती हैं। हालाँकि, इनमें से कोई भी अंतर स्वयं एक व्यक्ति की दूसरे पर श्रेष्ठता की स्थिति स्थापित नहीं कर सकता है। इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरान निर्दिष्ट करती है कि सम्पूर्ण मानव समुदाय  और महिलाएं दोनों आध्यात्मिक रूप से समान हैं, किसी के साथ कोई भेद नहीं है। "जो अच्छे कर्म करेगा, चाहे पुरुष हो या स्त्री, यदि वह ईमान वाला है तो ऐसे लोग जन्नत में दाख़िल होंगे। और उनका हक़ रत्ती भर भी मारा नहीं जाएगा।" (कुरान 4:124) सारे संसार के रचनाकार स्वामी ने अपनी किसी भी रचना में किसी के साथ कोई भेद नहीं किया है, हर चीज़ का अपना महत्व है और हर चीज़ के बिना जीवन शून्य है, सर्दी गर्मी सब को एक जैसी लगती है, बारिश सभी को भिगोती है, सूरज और चांद सब को समान रोशनी देता है, हवा जल भोजन सब कुछ एक जैसा समान नियम, सभी मां के गर्भ से जन्म लेते है, कोई भेद नहीं है, इंसान के श्रेष्ठता का पैमाना उसके कर्म है, जो अच्छे ...

जादू शैतान का काम: Magic Devil's Work

अगर कोई आदमी ये कहे कि जादूगर सितारों के नाम लेकर उनसे मुख़ातिब होते हुए नज़र आते हैं और इसके बाद उनका जादू मुकम्मल होता है, तो इसका जवाब ये है कि ये चीज़ जादू की तासी़र की वजह से नहीं शैतानों की तास़ीर की वजह से होती है, क्योंकि ख़ुद शैतानों ने जादूगरों को ये तालीमात दे रखी होती हैं कि वो सितारों को पुकारा करें, चुनांचे वो जब ऐसा करते हैं तो खुद शैतान जादू के सिलसिले में उनकी मदद करते हैं, लेकिन उसका पता जादूगरों को नहीं लगने देते।  कुछ जादूगर इस मक़सद के लिए क़ुरआन मजीद को अपने पावों से बांधकर बैतुलख़ला में जाते और कुछ कुरआन मजीद की आयात को गन्दगी से लिखते हैं, कुछ उन्हें हैज़ के ख़ून से लिखते हैं, कुछ क़ुरआनी आयात को अपने पावों के निचले हिस्सों पर लिखते हैं। कुछ जादूगर सूरह: फ़ातिहा को उल्टा लिखते हैं और कुछ बग़ैर वुज़ू के नमाज़ पढ़ते हैं और कुछ हमेशा हालत ए जनाबत में रहते हैं और कुछ जादूगरों को शैतान के लिए जानवर ज़िबह करने पड़ते हैं और वो भी बिस्मिल्लाह पढ़े बग़ैर और ज़िबह शुदा जानवरों को ऐसी जगह पर फ़ैंकना पड़ता है जिसको ख़ुद शैतान तय करता है।

Nikaah According Islam: बारात से मुतालिक़ उलेमा-ए-अहले हदीस़ इटावा का मुत्तफ़िक़ा फ़ैसला

 बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम बारात से मुतालिक़ उलेमा-ए-अहले हदीस़ इटावा का मुत्तफ़िक़ा फ़ैसला (गुज़ारिशात, हिदायात क़रारदाद तजावीज़ और आरा) इटावा। बतारीख़ 7 नवम्बर सन् 2023 ई0 बरोज़ मंगल बवक़्त बाद नमाज़े इशा मस्जिद मुहल्ला भूरा इटावा में जम-इय्यत उलेमा-ए-अहले हदीस़ शहर इटावा की एक हम मीटिंग मुनअक़िद हुई जिसमें बारात से मुतालिक़ चन्द ज़रूरी अहम और हस्सास पहलुओं पर ग़ौर व ख़ौज़ करने के बाद दर्ज ज़ेल गुज़ारिशात हिदायात क़रारदाद तजावीज़ और आरा पेश और मंज़ूर की गईं- (1) बारात एक ग़ैर इस्लामी रस्म है लिहाज़ा हत्तल मक़दूर बारातियों की तादाद कम की जाए बेहतर है कि सौ पचास की तादाद में पहुंचकर लड़की और उसके अहले ख़ाना के साथ मुकम्मल तआवुन करें। उमदा अख़्लाक़ और किरदार का मुज़ाहिरा पेश करें ताकि निकाह जैसी अहम सुन्नत और इबादत को आसान बनाया जा सके। (2) बारात में ख़्वातीन की शिरकत इन्तिहाई मायूब और ग़लत चीज़ है लिहाज़ा बेहतर है कि ख़्वातीन को बारात से दूर रखा जाए और इस हरकत को ग़लत और गुनाह तसव्वुर किया जाए, क्योंकि बारात में ख़्वातीन की शिरकत से बेहयाई, बेपर्दगी, तूफ़ान व बदतमीज़ी और अज़ीम फ़ितने को जन्म देती है। बेहतर है कि दुल...

एक मुस्लिम महिला वीज़ा लेने फिलिस्तीन दूतावास पहुँची, कहा बॉर्डर खोल दो हम जाना चाहते है : Palestine News

Twitter पर अशरफ़ हुसैन ने अपनी पोस्ट में एक वीडियो शेयर की है जिसमें एक मुस्लिम महिला फ़िलिस्तीन जाने के लिए फ़िलिस्तीन दूतावास पहुंच गई है वीज़ा लेने के लिए, जब रिपोर्टर्स ने उस महिला से बात की तो उसने कहा कि हम फ़िलिस्तीन जाना चाहते हैं, उसको बताया गया है कि वहां के हालात ठीक नहीं है जान का ख़तरा है तो उस महिला ने कहा, कि मौत तो बिस्तर पर भी आ जानी है हमें वहां जाना है और उनकी मदद करनी है, आगे बताते हुए कहा कि हमने एक मुहिम छेड़ी है उन लोगों की मदद के लिए हम फंड भी जमा कर रहे हैं। काश! ये जज़वा हर मुस्लिम शख़्स अपने अंदर पैदा कर ले तो शायद यहूद व नसारा हम मुसलमानों की तरफ आँख उठाने की हिम्मत भी न करें। ख़ैर, मैं अभी यही कहूंगा कि ऐसे हालात में उसका ये क़दम मुनासिब नहीं है, यदि मदद करना भी चाहती हैं तो और तरीक़े भी आज़मा सकती हैं। देखिए ट्वीट फिलिस्तीन जाने के लिए एक मुस्लिम महिला वीज़ा लेने फिलिस्तीन दूतावास पहुँच गई। कहा बॉर्डर खोल दो हम जाना चाहते हैं फिलिस्तीन… फिलिस्तीन जाने के लिए एक मुस्लिम महिला वीज़ा लेने फिलिस्तीन दूतावास पहुँच गई। कहा बॉर्डर खोल दो हम जाना चाहते हैं फिलिस्तीन… pic.tw...

3rd Shab E Qadar : नमाज़े तरावीह के बाद मस्जिदे अक़सा इटावा में आज इजलासे आम का आयोजन

  आज ब-मक़ाम मस्जिदे अक़सा, नई बस्ती शाहग्रान, इटावा में इन शा अल्लाह! बाद नमाज़े तरावीह 10 बजे से इज्तिमा शुरू हो जाएगा। जिसमें जनाब मौलाना मुहम्मद अशरफ सलफ़ी इटावी (हफिज़हुल्लाह) क़ुरआन व हदीस़ की रोशनी में खि़ताब फ़रमाएंगे और सदारत जनाब ज़ुबैर साहब फ़रमाएंगे। तमाम हज़रात से गुज़रिश है कि बिला तफ़रीक़ मसलक व मिल्लत इस इज्तिमा में शिरकत फ़रमाकर मवाइज़-ए-हस्ना से मुस्तफ़ीद हों और स़वाब-ए-दारैन हासिल करें. नोटः- ख़्वातीन के लिए पर्दे का माक़ूल इंतिज़ाम है।

Pay attention to the mosque's mutavalli and arrangements: मस्जिद के मुतवल्ली व इंतिज़ामिया ध्यान दें

हज़रत मौलाना ज़ाहिद उर राशिदी ( Maulana Zahid Ur Rashdi)  मुदज़ल्लह फ़रमाते हैंः कल क़यामत के दिन आपसे ये नहीं पूछा जाएगा कि मस्जिद में मार्वल, एसी, बेहतरीन क़ालीन और उमदा झाड़ फानूस वग़ैरा लगाए थे या नहीं? लेकिन अगर इमाम साहब को इतनी कम तनख़्वाह दी जिस से रोज़मर्रा की आम ज़रूरियाते ज़िन्दगी भी पूरी न हो सकें तो ये उनकी हक़ तलफी है जिसका हिसाब यक़ीनन अल्लाह के हां देना पड़ेगा। मस्जिद व मदरसे की आमदनी के सबसे ज़्यादा मुस्तहिक़ इमाम, मुअजि़्ज़न और असातज़ा हैं। ये जितने अच्छे और ख़ुशहाल रहेंगे मस्जिद और मदरसों का निज़ाम उतना ही अच्छा चलेगा। सिर्फ इमाम की तनख़्वाह देकर इमाम पर अज़ान की भी ज़िम्मेदारी डालना और झाड़ू वग़ैरह देने के काम पर मामूर करना ये उनकी तौहीन है। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि (हामिलीने क़ुरआन) क़ुरआन का इल्म रखने वाले की ताज़ीम करो, बेशक जिसने इनकी इज़्ज़त की उसने मेरी इज़्ज़त की। (अल जामिउल सग़ीर 1/14) तनख़्वाह अच्छी देना भी उनकी इज़्ज़त करने में दाखि़ल है और हदीस़ में है कि हामिलीने क़ुरआन इस्लाम का झण्डा उठाने वाले और उसको बढ़ावा देने वाले हैं जिसने उनकी ताज़ीम की उसने अल्लाह की ताज़...

Top 40 Most Important Facts about Deen-e-Islam: दीन-ए-इस्लाम की सबसे पहली 40 ख़ास जानकारियां

  ( बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम) 1. सबसे पहले अल्लाह रब्बुल आलमीन ने क़लम को पैदा किया। 2. अल्लाह ने अपने नूर से मलाइका (फरिश्तों) को पैदा किया। 3. अल्लाह ने जिन्नों और शैतानों को आग से पैदा किया। 4. छैः रोज़ में ज़मीन और आसमानों को बनाया। 5. पहले अल्लाह रब्बुल आलमीन का अर्श पानी पर था। 6. दुनियां के सबसे पहले आदमी (मर्द) हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) थे। 7. दुनियां की सबसे पहली औरत (ख़ातून) हव्वा (अलैहस्सलाम) थीं। 8. दुनियां की सबसे पहली औलाद हाबील और क़ाबील। 9. सबसे पहले सज़दा फ़रिश्तों ने आदम (अलै0) को किया। 10. सबसे पहली क़ुर्बानी क़ाबील (अलै0) की क़बूल हुई। 11. ज़मीन के ऊपर सबसे पहला क़त्ल क़ाबील ने हाबील का किया। 12. सबसे पहली भूल (ग़लती) आदम (अलै0) और हव्वा ने जन्नत में की। 13. सबसे पहले नबी हज़रत आदम (अलै0) थे। 14. सबसे पहली माफी आदम और हव्वा (अलै0) ने मांगी। 15. क़ुरआन की सबसे पहली आयत ‘‘इक़रा बि-इस्मी रब्बिकल लज़ी ख़लक’’ है। 16. सबसे पहली इबादतगाह ख़ाना-ए-काबा है। 17. सबसे पहले जन्नत में हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जाएंगे। 18. इस्लाम की सबसे पहली जंग ‘‘जंगेबदर’’ है। 19. सबसे पहली अज़...

Indian Law: देश एक है मगर कानून अलग - रेलवे स्टेशन की डिस्प्ले पर धार्मिक मंत्र

सूरत रेलवे स्टेशन की एक वीडियो ट्यूटर पर वायरल हो रही है जिसमें ट्रेन डिस्प्ले पर एक धाार्मिक मंत्र चल रहा है इसके लिए नीचे ट्यूटर की पोस्ट देखें- सूरत रेलवे स्टेशन की डिसप्ले पर धार्मिक मंत्र रेलवे में नमाज पढ़ने पर FIR हों जाती है , मगर वही गरबा और धार्मिक गीत पर कोई आपत्ती नही! देश एक है मगर कानून अलग ?? pic.twitter.com/KGlnFaxeft — Alisha Khan (@Team__Alisha) March 5, 2023

8 साल की बच्ची ने किया पूरा क़ुरआन मजीद हिफ्ज़

माशाअल्लाह इस 8 साल की बच्ची ने पूरा क़ुरआन मजीद हिफ्ज़ कर लिया है,अल्लाह इस बच्ची की मेहनत को क़ुबूल फरमाकर इसे लोगों की हिदायत का ज़रिया बनाए! ट्यूटर पोस्ट पर लोग इस बच्ची को ख़ूब मुबारकबाद पेश कर रहे हैं, अल्लाह तआला इस बच्ची को दीन ए इस्लाम की सरबुलंदी के लिए चुन ले, और रिया व नमूद से महफ़ूज़ रखे। आमीन सुम्मा आमीन   Masha allah ❤ Aameen https://t.co/n4ZCIgb5Ld — Aafreen fatima (@aafreenfatimaa) March 5, 2023

Ijlaas-e-Aam Pumplate of Bahuti Khandsari Siddarthnagar: बहूती खण्डसरी सिद्धार्थनगर में एक रोज़ा दावती व इस्लाही इजलास-ए-आम आज

सिद्धार्थनगर। दारूल उलूम बहूती ग्रांट ज़िला सिद्धार्थनगर की जानिब से आज रात 21 फरवरी 2023 वरोज़ मंगलवार को बाद नमाज़े इशा सरज़मीने बहूती में एक दावती व इस्लाही इज्तिमा होने जा रहा है जिसमें फ़ज़ीलतुश शैख़ हाफिज़ अब्दुल समी इब्ने कलीमुल्लाह मदनी (हफिज़हुल्लाह) दरयाबादी इस्लाहे मुआशरा के विषय पर, फज़ीलतुश शैख़ मौलाना रफीउद्दीन इब्ने नज्मुद्दीन रियाज़ी (हफिज़हुल्लाह) इल्म की अहमियत और ज़रूरत के विषय पर, फज़ीलतुश शैख़ मौलाना मुश्ताक़ अहमद इब्ने मुख़्तार अहमद रियाज़ी (हफिज़हुल्लाह) दरयाबादी नमाज़ की अहमियत के विषय पर, फज़ीलतुश शैख़ मौलाना अहमद हुसैन फ़ैज़ी (हफिज़हुल्लाह) फिक्रे आखि़रत के विषय पर क़ुरआन व हदीस़ की रोशनी में खि़ताब फरमाएंगे, इन शा अल्लाह! इजलास की सदारत फ़ज़ीलतुश शैख़ मौलाना फख़रूद्दीन रियाज़ी, निज़ामत फज़ीलतुश शैख़ मौलाना अब्दुल सलाम सोनी करेंगे, इन शा अल्लाह! तिलावते क़ुरआन: हाफ़िज़ मुहम्मद नसीम इब्ने मुहम्मद मुस्तक़ीम साहब हम्द बारी तआला: मौलाना नईम साहब रहमानी नअते पाक: वसीउल्लाह राइनी (हफिज़हुल्लाह)  आप तमाम हज़रात से शिर्कत की दरख़्वास्त की जाती है, ख़्वातीन के लिए परदे का भी माक़ूल इंतिज़ाम क...

Islah-E-Muashra Conference Pumplate Agra on 18 February 2023: आगरा में इस्लाह ए मुआशरा कांफ्रेंस का आयोजन आज

  आज दिनांक 18 फरवरी 2013 को हुदा इंटरनेशनल स्कूल, सैक्टर इ 4 ताज नगरी फेस 2 आगरा में एक इस्लाहे मुआशरा कांफ्रेंस का आयोजन मग़रिब की नमाज़ के बाद अम्मारा हाॅल में होने जा रहा है जिसमें मशहूर आलिम व जमाअते अहले हदीस़ हिन्द के सदर फ़ज़ीलतुश शैख़ असग़र अली इमाम मेहदी सलफी (हफिज़हुल्लाह), फ़ज़ीलतुश शैख़ जफरूल हसन मदनी (हफिज़हुल्लाह), फ़ज़ीलतुश शैख़ मक़सूदुल हसन फ़ैज़ी (हफिज़हुल्लाह), फ़ज़ीलतुश शैख़ अबू ज़ैद ज़मीर (हफिज़हुल्लाह) खि़ताब फ़रमाएंगे।  सदारत फ़ज़ीलतुश शैख़ क़ारी नज़मुल हसन फ़ैज़ी (हफिज़हुल्लाह) करेंगे और निज़ाम ए कांफ्रेंस जनाब मौलाना इफ्तिख़ार उसमानी, जनाब मौलाना शमीम रियाज़ी, और जनाब मौलाना जुबैर सनाबली करेंगे तथा कनवीनर जनाब मौलाना अब्दुल क़ुद्दूस रियाज़ी (हफ़िज़हुल्लाह) महासचिव दारूल हुदा एजूकेशनल एएड वेलफियर सोसाइटी हैं। इन शा अल्लाह! तमाम ब्रादराने इस्लाम से शिरकत की दरख़्वास्त है। ख़्वातीन के लिए परदे का माक़ूल इंतिज़ाम किया गया है। बाहर से आने वाले मेहमानों के लिए खाने-पीने और ठहरने का भी इंतिज़ाम रहेगा। (इन शा अल्लाह)। नोटः- बाहर से आने वाले मेहमान अपने आने की इत्तिला पहले दें। अधिक जानकारी ...

Ijlaas-e-Aam Pumplate of Madrasa Umar bin Khattab: 19 फरवरी 2023 को मस्जिद व मदरसा उमर बिन ख़त्ताब में अज़ीमुल शान इजलास-ए-आम का आयोजन

  मस्जिद व मदरसा उमर बिन ख़त्ताब अचार गली, शील फाटा, कौसा मुमबरा थाने में दिनांक 19 फरवरी 2023 को मगरिब की नमाज़ के बाद से रात 10 बजे तक एक अज़ीमुल शान इजलास-ए-आम का आयोजन होने जा रहे हैं जिसमें जनाब मुहम्मद आतिफ़ सनाबिली साहब इस्लाम और औरत के विषय पर, हाफ़िज़ अबू ज़र मदनी साहब  ज़लज़ले के विषय पर, मौलाना सरफ़राज़ फैज़ी साहब माल व दौलत की फ़ज़ीलत और फितने के विषय पर, मौलाना अरशद सकरावी साहब मुस्लिम नौजवानों का किरदार कैसा होना चाहिए? के विषय पर, इंजीनियर इज़हार खान साहब तालीम की अहमियत व अफ़ादीयत के विषय पर, और मौलाना सलीम अहमद सिराजी साहब बच्चों की तरबियत क्यों और कैसे? के विषय पर भाषण देगें, इस इजलास की सदारत मौलाना हमीदुल्लाह सलफ़ी साहब करेंगे तथा ज़ेरे सरपरसती अब्दुल रशीद मलिक और ज़ेरे एहतिमाम इस्लामिक रिसर्च सेंटर. नोटः औरतों के लिए पर्दे का इंतिज़ाम भी किया गया है। आप तमाम लोगों से शिरकत की गुज़ारिश की जाती है। ज़ेरे निगरानी: अदशद कमाल साहब तिलावत-ए-क़ुरआन: जमील अहमद क़ासमी साहब निज़ामतः डाक्टर अब्दुल्लाह फैसल (एडिटर अल मिसबाह मुमबई) 

Complete tour of Masjid-E-Nabawi: मस्जिद का मक़ाम व मर्तबा : Khutba e Juma

अल-मस्जिद अन-नबवी, जिसे अंग्रेजी में (Prophet's Mosque) पैगंबर की मस्जिद के रूप में जाना जाता है, सऊदी अरब के अल मदीना प्रांत के मदीना शहर में इस्लामी पैगंबर मुहम्मद सल्ल0 द्वारा निर्मित एक मस्जिद है। यह कुबा मस्जिद के बाद मदीना में मुहम्मद सल्ल0 द्वारा निर्मित दूसरी मस्जिद थी, और इस्लाम में दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद और दूसरी सबसे पवित्र स्थल है, दोनों मक्का में मस्जिद अल-हरम के बाद रैंकिंग करते हैं। मस्जिद मदीना के केंद्र में स्थित है और एक प्रमुख तीर्थ स्थल है जो दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक के दायरे में आता है। और ये कि मस्जिदें सिर्फ अल्लाह के लिये ख़ास हैं, पस अल्लाह तआला के साथ किसी और को न पुकारो - सूरह जिन आयत नं0: 18 मस्जिदे-नबवी की तामीर के मुताल्लिक़ लोगों की बातों को सुन कर आप ने फ़रमाया कि तुम लोगों ने बहुत ज़्यादा बातें की हैं। हालाँकि मैंने नबी करीम (सल्ल०) से सुना है कि जिसने मस्जिद बनाई बुकैर (रावी) ने कहा, मेरा ख़याल है कि आप ने ये भी फ़रमाया कि उस से मक़सद अल्लाह तआला की रज़ा हो  तो अल्लाह तआला ऐसा ही एक मकान जन्नत में उसके लिये बनाएगा। (सहीह बुख़ारी हदीस ...

The biggest condition of being a Muslim: मुसलमान होने की सबसे बड़ी शर्त

कोई आदमी उस वक़्त तक मुसलमान नहीं हो सकता जब तक कलमा-ए-तय्यबा पर उसका ईमान न हो।

Masjid e Nabwi Tour: मस्जिदे नवबी टूर

Shaikh Muhammad Aasim As'ad Salafi Etawi (Hafizahullah) काफी दिनों से इरादा था कि यहां एक यूट्यूब चैनल बनाया जाए और इसमें कम से कम चार साला तमाम यादों को वीडियोज़ की शक्ल में जमा किया जाए ताकि बीते ज़मानें की याद सताए तो सारी यादें मौजूद हों। नीज़ इसके आलावा कभी कभी वीडियोज़ की शक्ल में पैग़ाम देने का दिल करे तब भी इसका इस्तेमाल किया जा सके। लिहाज़ा इस चैनल पर आपको किभी भी तरह की वीडियोज़ मिल जाएंगी जो इन शा अल्लाह किसी न किसी के लिए ज़रूर फायदेमंद होंगीं। अगर आप भी राग़िब हैं तो चैनल को सब्स्क्राइब करें और अगर आपका अपना यूट्यूब चैनल है तो उसकी लिंक कमेंट में दें, हम भी आपको सब्स्क्राइब करेंगे, इन शा अल्लाह। नीचे वीडियो को लिंक दिया गया है जिसमें मस्जिदे नबवी का मुख़्तसर टूर है इसे ज़रूर देखें। मिन जानिब- शैख आसिम असअद सलफ़ी इटावी (हफिजहुल्लाह), मदीना मुनव्वरह

Splashing towards the shame after Wuzu: वुज़ू के बाद शर्मगाह की तरफ छींटे मारना

(बिस्मिल्लाहिर्रमानिर्रहीम) सवालः वुज़ू के बाद शर्मगाह की तरफ छींटे मारने की शरई हैसियत क्या है? जवाबः वुज़ू के बाद शर्मगाह की तरह छींटेे मारना शरई तौर पर जायज़ और दुरूस्त है, इसके ज़रिए शैतानी वसवसे दूर होते हैं। सहीह हदीस़ मेें हैः ‘‘रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पेशाब करते तो वुज़ू करते और शर्मगाह पर पानी के छींटे मारते।’’ (हवाला - अबू दाऊद सहीह हदीस़: 166, हाकिम: 1/171, इस रिवायत को इमाम हाकिम रहिमहुल्लाह और इमाम ज़हवी ने बुख़ारी व मुस्लिम की शर्त पर सहीह कहा है।) सुनन नसाई में ये अल्फ़ाज़ हैं- ‘‘हज़रत हकम बिन सुफियान रज़ि0 से रिवायत है वो बयान करते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्ल0 को देखा आप ने वुज़ू किया और अपनी शर्मगाह पर पानी छिड़का।’’ (हवाला - नसाई: 134,135) हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से एक आदमी ने शिकायत की कि मैं जब नमाज़ में होता हूँ तो मुझे ख़्याल आता है कि मेरे ज़कर पर तरी है तो हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ि0 फ़रमाते हैंः ‘‘अल्लाह शैतान को ग़ारत करे वो नमाज़ में इंसान की शर्मगाह को छूता है ताकि उसे ये ख़्याल दिलाये कि वो बे वुज़ू हो गया है, जब तुम वुज़ू करो तो अपनी शर्मग...