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जून, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Health Defense : जनन स्वस्थ रक्षा और शक्ति की हिफ़ाज़त : Protection of Vigor

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Health Defense : प्रिय पाठकगण, अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रका तुहू! उम्मीद है कि आप सभी को इस्लामिक न्यूज़ की “सच्ची खबरें अनमोल खबरें” ज़रुर पसन्द आ रही होगी और इससे आप सभी को अनमोल ज्ञान की प्राप्ति भी हो रही होगी। आज हम आपको जनन स्वस्थ रक्षा Heath Defense और शक्ति की हिफ़ाज़त Protection of Vigor के विषय पर लेख प्रकाशित कर रहे हैं Health Defense पर ख़ास बिन्दुओं पर नज़र डाली गई है कि किस प्रकार हम अपनी Health Defense की सुरक्षा कर सकते हैं और अपने स्वास्थ्य Health Defense को शक्तिशाली बना सकते हैं। इस पोस्ट में हम अपने प्यारे और भोले भाले नौजवानों को निम्नलिखित ऐसी बातों और कामों से अवगत कराना चाहते हैं जिसका जानना आपके लिए अत्यन्त आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है। और वो ये है – जिंसी हिफ़ज़ाने सेहत (जनन स्वस्थ रक्षा) जिंसी आज़ा (जनन अंगों) को सेहतमंद व तन्दुरुस्त रखने का नाम जिंसी हिफ़ज़ाने सेहत (जनन स्वस्थ रक्षा) है। इसमें आपको निम्नलिखित बातों का ख़ास ख़्याल रखना पड़ेगा – 1. पेशाब वाली नाली, खसये (वृषण) और मसान (मूत्राशय) खूब साफ़ रखें। वहां मैल-कुचैल या पसीना जमा न होने दें। 2. प...

Divorce : तलाक़ देने और लेने से बचो : Avoid divorce at all costs

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Divorce : बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम : पोस्ट में तलाक़ Divorce के विषय पर चर्चा की गई है जिसमें तलाक़ Divorce से बचने की तलक़ीन की गई है और बताया गया है कि शादीशुदा ज़िंदगी इंसान की बहुत ही ख़ुशगवार गुज़रती है लेकिन “तलाक़” Divorce ये शादीशुदा ज़िन्दगी का बहुत ही तकलीफ़देह मोड़ होता है, यानी शौहर और बीवी का जो निकाह का पाकीज़ा रिश्ता होता है ये तलाक़ Divorce के ज़रिए से टूट जाता है। अतः इसे तलाक़ Divorce के विषय को ध्यानपूर्वक पढ़ें। Now let’s start Avoid divorce at all costs तलाक़ देने और लेने से हर क़ीमत पर बचने की कोशिश करें – ज़िन्दगी इन्फ़िरादी हो या परिवारिक जिन्दगी हो, इस्लाम बुनियादी तौर पर कानून, रजामन्दी, इन्तेहाद, भाईचारे और मुहब्बत और रहम का परचम बुलन्द करता है। लड़ाई-झगड़ा, फूट-बिखराव, रिश्तों और रिश्तेदारों के हक में नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया है कि रिश्तो को काटने वाला जन्नत मे दाख़िल नहीं होगा। (बुखारी व मुस्लिम) एक और जगह आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया – रहम अल्लाह तआला के अर्श के साथ जुड़ा है और कहता है जो मुझे मिलाये अल्लाह तआला ...

Numbers : 786 का सच (हक़ीक़) क्या है? जानिऐ : Truth of 786

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Numbers 786 : बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रकातुहू! अज़ीज़ दोस्तों, पोस्ट की हैडिंग से आप जान ही चुके हैं कि इस पोस्ट में Numbers 786 का सच क्या है? जानकारी दी जा रही है। इन Numbers 786 की हक़ीक़त जानना आपके लिए बहुत ज़रूरी है। अगर आज हमने इन Numbers 786 के सच को नहीं जाना तो समझ लीजिए कि हम अंजाने में किसी गुनाह का इर्तिकाब कर रहें हैं। अतः आप सभी से गुज़ारिश है कि Numbers 786 की हक़ीक़त पर आधारित इस पोस्ट को पूरा ज़रूर पढ़ लीजिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए एवं गुनाह करने से बच जाऐं, अब पेश है : What is the truth of the numbers 786? कुरान और हदीस की दूरी के सबब आज मुसलमानों में ना जाने कितनी ऐसी बुराई हैं जिसे वो अच्छाई समझ के कर रहा है और उसे अपने दीन का हिस्सा समझता है। इसी क़िस्म की एक बुराई 786 है जिसे आम तौर पर लोग किसी काम की शुरूआत (जैसे ख़त, दुकानों में, गाड़ियों में) में लिख देते हैं और यह समझते हैं कि ये بسم اللّٰه الرحمٰن الرحيم है। जबकि न तो कभी नबी (सल्ल0) ने इसे किसी काम की शुरूआत में लिखा न कभी सहाबा ने इसे लिखा। ग़ौर व फ़िक्...

Disbeliever : शब्द ‘काफ़िर’ का अर्थ : The Meanings of Faithless

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Disbeliever : काफ़िर (Disbeliever) शब्द तीन अरबी मूल अक्षरों ‘क-फ़-र’ से बना है। क़ुरआन में इस मूल से बने 54 शब्दों में से 51 शब्द जो (74 अध्यायों (सूरा) की 479 आयतों में 521 बार आए हैं), निम्नलिखित भाव में प्रयुक्त हैं। इन सारे शब्दों का मूल शब्द ‘कुफ़्र’ है; काफ़िर (Disbeliever) का अर्थ है: The meaning of the word ‘Kafir’ (Disbeliever). *‘कुफ़्र’ करने वाला* कुफ़्र के कई अर्थ हैं, जैसे – *इन्कार करना, छिपा लेना, हटा देना, दूर कर देना, प्रतिकूल कार्य करना, दबा देना, मिटा देना, अवहेलना करना, छोड़ देना , ना शुक्री करना आदि।* (किसान के ज़मीन में बीज दबा देने के लिए भी अरबी में ‘कुफ़्र’ शब्द प्रयुक्त होता है)। पारिभाषिक अर्थ इस्लाम (और क़ुरआन) की पारिभाषिक शब्दावली में ‘कुफ़्र’ शब्द कई अर्थों में प्रयुक्त हुआ है। जैसे: इस्लाम की वास्तविकता समझ लेने के बाद उस पर ईमान लाने के बजाय, इस्लाम का इन्कार कर देना, मन-मस्तिष्क पर ‘सत्य’ स्पष्ट हो जाने के बाद भी उसे छिपा लेना, दबा देना, तिरस्कृत कर देना। यह शब्द स्वयं मुसलमानों के भेस में, कपटाचारियों  के उस कृत के लिए भी प्रयुक्त हुआ है जो इस्लाम की ...

Dangers : इंसान की ज़िन्दगी में ख़तरे ही ख़तरे : Human Life

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Dangers in Human Life : क्या आप जानते हैं कि इंसानी ज़िंदगी ख़तरों (Dangers) से भरी है और आपको भी इनसे वास्ता (सामना) पड़ेगा। इसलिए हम आपकी उमर को मद्देनज़र रखते हुए ऐसे ख़तरों (Dangers) से आगाह कर रहे हैं, जिनका ताल्लुक़ (संबंध) ज़्यादातर आपसे है और जिनसे बचना आपके लिए अत्यन्त आवश्यक है। अतः इस पोस्ट में 4 ख़तरों (Dangers) को बताया जा रहा है। Now let’s start Dangers in Human Life: Dangers. नम्बर 1: सबसे बड़ा ख़तरा हमजोलियों (दोस्तों) से होता है, क्योंकि अगर ये दोस्त बदज़बानी करने वाले होंगे तो आप भी उनकी देखादेखी गालियाँ बकने लगेंगे। गंदी बातें आपकी आदत बन जाएंगी और किसी अच्छी सोसायटी में बैठने के क़ाबिल नहीं रहेंगे। फिर मुहल्ले के बदकार (दुष्ट) लोग और दुकानदार आपको लालच देकर बुरे कामों में फंसाने की पूरी-पूरी कोशिश करेंगे और आप नासमझी और नादानी की वजह से उनके चंगुल में फंस जाएंगे। इसलिए बदमाश लोग, बदचलन, दुकानदार, आवारा मिज़ाज, ख्वान्चा फ़रोश ऐसे मर्द और औरतें या लड़के और लड़कियाँ जो ख़राब आदतों के मालिक हैं। आपके लिए सबसे ज़्यादा ख़तरनाक साबित हो सकते हैं और इनसे बचना आपके लिए बिल्...

Thought Power : आज्ञापालन किसका? : Whose obedience?

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Thought Power : बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, प्रिय पाठकगण, अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रकातुहू! इस पोस्ट में हम चर्चा कर रहे हैं मनुष्य के विचार शक्ति (Thought Power) की कि उसे अपने विचार शक्ति (Thought Power) मतलब सोचने व समझने की ताक़त जिसे ईश्वर ने संसार के हर एक प्राणी को प्रदान की है। जिसके द्वारा वो अपने कार्यों को भलि भाँति कर सकते हैं। परन्तु जो विचार शक्ति (Thought Power) मनुष्य को प्रदान की गई वो किसी और को प्रदान नहीं की गई है। अब मनुष्य अपने विचार शक्ति (Thought Power) से विचार करें कि उन्हें आज्ञापालन किसका (Whose Obedience) करना चाहिए किसकी इताअत और इबादत (प्रार्थना) करनी चाहिए। परन्तु मनुष्य अपनी विचार शक्ति (Thought Power) का उपयोग कदापि नहीं करता है और वो ईश्वरीय पूजा पर विभिन्न देवी देवताओं की पूजा पाठ में लग कर अपने विचार शक्ति (Thought Power) का ग़लत उपयोग करके अंधकार में डूबता चला जा रहा है। अतः इस पोस्ट के माध्यम से इस संदेश को आप तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। Now let’s start Thought Power : Whose Obedience ? ईश्वर ने इस धरती को बनाया और इस धरती पर मनुष...

Story of Bani Israel : क़िस्सा बनी इस्राईल,1000 दीनार क़र्ज़

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(Sahih Bukhari - 2291) बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम! अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रकातुहू, अज़ीज़ साथियों! इस पोस्ट में बनी इस्राईल का एक अज़ीम क़िस्सा (A Great Story Of Bani Israel) सहीह बुख़ारी की हदीस नम्बर : 2291 के हवाले से दिया गया है। इस बनी इस्राईल के क़िस्से (Story of Bani Israel) को आप अरबी, अंग्रेज़ी, हिन्दी और उर्दू भाषा में पढ़ सकते हैं। ये बनी इस्राईल का क़िस्सा Story of Bani Israel इस लिए अज़ीम (Great) है क्योंकि इसमें 1000 दीनार क़र्ज़ के लेनदेन के मामले को लेकर ईमान की हक़ीक़त को बयान किया गया है। बनी इस्राईल के इस क़िस्से (Story of Bani Israel) का अच्छी तरह अध्ययन करें, इस पोस्ट में बनी इस्राईल के क़िस्से (Story of Bani Israel) की वीडियो भी यहां देख सकते हैं। अब पेश है Story of two men of Bani Israel and 1000 Dinar Loan. अबू अब्दिल्लाह (इमाम बुख़ारी रह.) ने कहा कि लैस़ ने बयान किया, उनसे जाफ़र बिन रबीआ ने, उनसे अब्दिर्रहमान बिन हुर्मुज़ ने और उनसे अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु ने कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बनी इस्राईल के एक शख़्स का ज़िक्र फरमाया कि ...