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जनवरी, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

How to create your own free blog on Blogger and how to earn money? : ब्लॉगर पर ख़ुद का फ्री में ब्लाॅग कैसे बनाएं और कैसे पैसा कमाएं?

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ब्लॉगर पर ख़ुद का फ्री ब्लाॅग कैसे बनाएं और कैसे पैसा कमाएं? | How to create your own free blog on Blogger and how to earn money? हैडिंग पढ़कर आप समझ गये होंगे कि इस पोस्ट में हम आपको क्या बताने जा रहे हैं, जी हां, बिल्कुल सच समझा। आप स्वयं का बिल्कुल फ्री में अपना ब्लाॅग बनाकर हर महीने हज़ारों रूपये कमा सकते हैं ये पोस्ट उन लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो लोग अपने घर पर फ्री रहते हैं या उनको अभी तक कोई रोज़गार नहीं मिला है.  दोस्तों, घर बैठे कमाई करने का सबसे अच्छा तरीक़ा ऑनलाइन ब्लाॅगिंग है, आप जो भी पोस्ट डालोगे उसमें गूगल एडसेंस अप्रूबल  के बाद एड दिखाई देगी फिर जो भी उस एड पर क्लिक करेगा उसके माध्यम से आपकी कमाई होती है, परन्तु एक बात हमेशा ध्यान रखना कि बग़ैर मेहनत के कुछ भी हासिल नहीं होता है इसी लिए सबसे पहले आपको यह निर्णय करना होगा कि हमें किस प्रकार का ब्लाॅग  (Blog Website)  बनाना है और उसमें भरपूर मेहनत करनी है तभी आप कमाई कर सकते हैं अन्यथा आपकी मेहनत बर्बाद भी हो सकती है। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और सीखते हैं कि कैसे हम अपना ख़ुद का ब्लाॅग (Blog Website) ...

Muslim Community : अब भी ना जागे तो...

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"बैठक में मौजूद मुस्लिम "बुद्धिजीवियों" और मुस्लिम "संगठन" ने इस बात पर सहमति जताई कि बाबरी मस्जिद की तरह काशी और मथुरा की मस्जिदों पर भी आने वाले कोर्ट के फैसले को वे स्वीकार करेंगे" "बैठक में मौजूद मुस्लिम "बुद्धिजीवियों" और मुस्लिम "संगठन" ने इस बात पर सहमति जताई कि बाबरी मस्जिद की तरह काशी और मथुरा की मस्जिदों पर भी आने वाले कोर्ट के फैसले को वे स्वीकार करेंगे" pic.twitter.com/Hg6ENgBwTd — Muslim Spaces (@MuslimSpaces) January 26, 2023

Khutbat E Juma in Etawah for 27 January 2023 : उर्दू/हिन्दी इश्तिहार दिनांक 27 जनवरी 2023 दिन जुमा

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  शहर इटावा में ख़ुत्बात ए जुमा  उर्दू इश्तिहार  दिनांक  13 जनवरी 2023  दिन जुमा (04 रजब 1444 हि0) शहर इटावा में ख़ुत्बात ए जुमा  हिन्दी इश्तिहार  दिनांक  13 जनवरी 2023  दिन जुमा (04 रजब 1444 हि0)

do not disappoint: अल्लाह की रहमत से मायूसी कुफ्र है

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दोस्तों! मुसीबत में अल्लाह की रहमत से कभी भी हमें मायूस नहीं होना चाहिए, बल्कि अल्लाह के फ़ज़ल व करम के उम्मीदवार रहो, जैसाकि अल्लाह ने अपनी किताब क़ुरआन मजीद की सूरह यूसुफ-12 की आयत नं0-87 में इरशाद फ़रमाया हैः  ‘‘मेरे प्यार बच्चों! तुम जाओ और यूसुफ अलैहिस्सलाम की और उसके भाई की पूरी तरह तलाश करो और अल्लाह की रहमत से मायूस न हो, क्योंकि अल्लाह की रहमत से काफ़िर ही मायूस होते हैं।’’ पस कितनी ही बड़ी मुसीबत क्यों न हो दिल शिकनी हरगिज़ न होना चाहिए शरियत में इसकी ताकीद की गई है कि मुसीबत के वक़्त में ना उम्मीद होने के बजाए हक़ तआला से उम्मीदवार रहना चाहिए, क्योंकि असबाब से बढ़कर भी तो कोई चीज़ है। ना उम्मीदी की बात तो वो कहते हैं जिसका दीन (ईमान) तक़दीर पर न हो महज़ तदबीर पर हो।

A painful story of an Kuwaiti old father's love: एक बूढ़े बाप की मुहब्बत का दर्द भरा क़िस्सा

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एक बूढ़ा आदमी अदालत में दाखि़ल हुआ ताकि अपना मुक़दमा क़ाज़ी के सामने पेश करे। क़ाज़ी ने पूछा आपका मुक़दमा किसके खि़लाफ़ है?   बूढ़ा: अपने बेटे के खि़लाफ़। क़ाज़ी हैरान हुआ और पूछाः क्या शिकायत है? बूढ़ाः मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के मुताकिब़ माहाना ख़र्च मांग रहा हूँ। क़ाज़ीः ये तो आपका अपने बेटे पर ऐसा हक़ है कि जिसके लिए दलीलों को सुनने की ज़रूरत ही नहीं है। बूढ़े ने कहा क़ज़ी साहब! इसके बावजूद कि मैं मालदार हूँ और पैसों का मोहताज नहीं हूँ, लेकिन मैं चाहता हूँ कि अपने बेटे से माहाना ख़र्च वसूल करता रहूँ। क़ाज़ी हैरत में पड़ गया और बूढ़े से उसके बेटे का नाम और पता लेकर उसे अदालत में पेश होने का हुक्म जारी किया। बेटा अदाल में हाज़िर हुआ तो क़ाज़ी ने उससे पूछाः क्या ये आपके वालिद हैं? बेटाः जी हां, ये मेरे वालिद हैं। क़ाज़ी: इन्होंने आपके खि़लाफ़ मुक़दमा दायर किया है कि आप इनको माहाना ख़र्च अदा करें। बेटे ने हैरत से कहा, वो मुझसे ख़र्च क्यों मांग रहे हैं जबकि वो ख़ुद बहुत मालदार हैं और इन्हें मेरी मदद की ज़रूरत ही नहीं है। क़ाज़ीः ये आपके वालिद का तक़ाज़ा हैऔर वो अपने तक़ाज़े में आज़ाद हैं और उनका ये हक़ है। बूढ़े ने कह...

Swati Maliwal stunt video: दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को भी कार से घसीटने की कोशिश

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Swati Maliwal : कल देर रात मैं दिल्ली में महिला सुरक्षा के हालात Inspect कर रही थी। एक गाड़ी वाले ने नशे की हालत में मुझसे छेड़छाड़ की और जब मैंने उसे पकड़ा तो गाड़ी के शीशे में मेरा हाथ बंद कर मुझे घसीटा। भगवान ने जान बचाई। यदि दिल्ली में महिला आयोग की अध्यक्ष सुरक्षित नहीं, तो हाल सोच लीजिए। कुछ लोग स्वाति मालीवाल को झूठा बता रहे हैं इसी का जवाब देते हुए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने ट्वीट करते हुआ लिखाः ये है स्वाति मालीवाल का विडियो, ABP न्यूज़ के साथ मिलकर ये स्टंट किया गया हाथ उन्होंने ख़ुद कार में डाला और उन्हें घसीटा नहीं गया इस कार से पहले लगभग 10 और कारों में स्वाति ने हाथ डाला उस रात कोई ना कोई ड्रामा हो इसका प्लान था स्वाति मालीवाल स्टंट वीडियो pic.twitter.com/4kGGwNwF7B — CWR News (@cwresearcher) January 22, 2023

Sahih Bukhari 1442 : दो फ़रिश्तों की दुआ और बद दुआ

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(बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम),  दोस्तों, अल्लाह की राह में ख़र्च करने की बहुत फ़ज़ीलत है, अल्लाह की राह में ख़र्च करने से मुराद अपने घर वालों पर, रिश्तेदारों पर, ग़रीबों और मोहताजों पर, पड़ौसियों पर, मिसकीनों, यतीमों और बेबस व बेसहारा लोगों पर ख़र्च करना, ऐसे लोगों के लिए फ़रिश्ते दुआ करते हैं और जो लोग अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते उनके लिए सख़्त वईद आयी है और इनके लिए फ़रिश्ते बद दुआ करते हैं।  अल्लाह की राह में खर्च करने को ही सदक़ा कहते हैं और सदक़ा करने वाले के लिए फरिश्ता दुआ करता है जैसाकि सही बुख़ारी की हदीस नं0 1442 में अबु हुरैरह रज़ि0 फरमाते हैं कि नबी अकरम सल्ल0 ने फ़रमाया कि "कोई दिन ऐसा नहीं जाता कि जब बन्दे सुबह को उठते हैं दो फरिश्ते आसमान से न उतरे, मतलब दो फ़रिश्ते रोज़ उतरते हैं, एक फ़रिश्ता ये कहता है ‘‘ऐ अल्लाह! ख़र्च करने वाले को इसका बदला दे’’ और दूसरा कहता है कि ‘‘ऐ अल्लाह ‘‘मुमसिक’’ को और बख़ील के माल को तल्फ कर दे, ख़त्म कर दे, बर्बाद कर दे, हलाक कर दे’’। दो फ़रिश्ते आसमान से उतरते हैं एक दुआ देता है ख़र्च करने वाले को बेहतर बदला दे और एक बद दुआ देता है कि ...

Dua for leaving and entering the house: घर से निकलने, प्रवेश करने और खाना शुरू करने से पहले ये दुआ पढ़ने के फ़ायदे

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(बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम)  दोस्तों, हम ना जाने कितने बार अपने घर से निकल कर बाहर जाते हैं और जब बाहर जाते हैं तो घर की ओर वापस आकर घर में प्रवेश भी करते हैं परन्तु घर से निकलते समय और प्रवेश करते समय हम अक्सर दुआओं को नहीं पढ़ते हैं जो हमें पढ़नी चाहिए। दर हक़ीक़त, आप लोगों को इन दुआओं का फ़ायदा नहीं मालूम है यदि आप लोग इसके लाभ जान लेंगे तो मुझे आशा है कि आप लोग इन दुआओं को ज़रूर पढ़ने लग जाओगे। फ़ायदे के सम्बंध में हम आपके  समक्ष  सुनन अबू दाऊद की हदीस नं0 5095 और तिर्मिज़ी की हदीस नं0 3426 पेश कर रहे हैंः सय्यदना अनस बिन मालिक रज़ि0 से रिवायत है कि रसूल अल्लाह सल्ल0 ने फ़रमाया: ‘‘जब बन्दा अपने घर से निकले और ये कलिमात कह ले- ‘‘बिस्मिल्लाह तवक्कल्तु अलल्लाह ला हौवला वला क़ुव्वतः इल्लाबिल्लाह’’ अल्लाह के नाम से, मैं अल्लाह अज़्ज़ व जल पर भरोसा करता हूँँ, किसी शर और बुराई से बचना और किसी नेकी या ख़ैर का हासिल होना अल्लाह की मदद के बग़ैर मुमकिन नहीं।’’ तो उस समय उसे ये कहा जाता हैः तुझे हिदायत मिली, तेरी किफ़ायत की गई और तुझे बचा लिया गया (हर बला से)। चुनांचे शयातीन उस से दूर ...

Wuzu with Nail Polish : नेल पाॅलिश के साथ वुज़ू

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सवाल: क्या नाख़ून पर नेल पाॅलिश मौजूद होने की सूरत में वुज़ू होगा या नहीं? जवाबः क़ुरआन-ए-हकीम में वुज़ू के बारे में इरशाद-ए-बारी तआला हैः ऐ ईमान वालों! जब तुम नमाज़ का इरादा करो तो अपने चेहरों और हाथों को धो लो। (सूरह अल-मायदा: 6)  इस आयते करीमा में चेहरे और हाथों को धोने का हुक्म है। वुज़ू में उनका धोना फ़र्ज़ है। जब नाख़ूनन पर नेल पाॅलिश लगी हो तो नाख़ून धोए नहीं जा सकते जिससे वुज़ू नहीं होता। वुज़ू में हाथों और पावों की उंगलियों का ख़लाल इसी लिए है कि पानी की तरी का अस़र हर हिस्से पर अच्छी तरह पहुंच जाए।  इसी तरह हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि0 से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्ल0 एक सफर में हम से पीछे थे। आपने हमें इस हालत में पाया कि नमाज़ का वक़्त था और हम वुज़ू कर रहे थे, हम अपने पावों को हलका सा धो रहे थे तो आपने बुलंद आवज़ से कहाः ऐढ़ियों के लिए आग की हलाकत है। (बुख़ारी, किताबुल इल्म: 60) इसी तरह सहीह बुख़ारी में इमाम इब्ने सीरीन ताबई रहिमहुल्लाह के बारे में है कि वो जब वुज़ू करते तो अंगूठी वाली जगह को धोते थे। ये सिर्फ इसी लिए था कि उंगलियां ख़ुश्क ना रह जाएं, क्योंकि वुज़ू में जो आज़...

Khutbat E Juma in Etawah for 13 Jan 2023 : उर्दू/हिन्दी इश्तिहार दिनांक 13 जनवरी 2023 दिन जुमा

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  शहर इटावा में ख़ुत्बात ए जुमा  उर्दू इश्तिहार  दिनांक 13 जनवरी 2023 दिन जुमा (20 जमादि-उल-आखि़र 1444 हि0) शहर इटावा में ख़ुत्बात ए जुमा  हिन्दी इश्तिहार  दिनांक 13 जनवरी 2023 दिन जुमा (20 जमादि-उल-आखि़र 1444 हि0)

Guwahati Pustak Mela : गुवाहाटी पुस्तक मेले में सबसे ज़्यादा बिकने वाली किताब बनी असमीज में लिखी कुरान

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किसी भी वस्तु को बिना चखे उसका स्वाद बताना, अथवा किसी अन्य की बात सुनकर दूसरे पक्ष को जाने समझे बिना नतीजे पर पहुँच जाना यह बात न तो तर्क संगत है और न ही किसी बुद्धिमान और सुचरित्र इंसान का लक्षण है। जब इंसान अपनी आँखों के बजाय दूसरें की आँखों से देखने लगे, जब इंसान अपने दिमाग की जगह दूसरें के दिमाग से सोचने लगे, और दूसरे की कही बात को बिना सोचे समझे मानने लगे, तो समाज में नफरत फैलाना और लोगों को बांटना बहुत ही आसान हो जाता है । आज इस्लाम और मुसलमानों के नाम पर तरह तरह प्रोपगंडे हर रोज फैलाये जा रहे हैं और लोग सच भी मान रहे है. खबर है कि गोहाटी में पुस्तक मेला चल रहा है और वहाँ सबसे अधिक लोगों का ध्यान जिस पुस्तक की ओर गया है वह क़ुरआन है, यह हमारे उज्जवल भविष्य की ओर संकेत है कि लोग सच्चाई जानना चाहते हैं, और यह प्रयास हर किसी को करना चाहिये, क्यों कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आयेगी, गलत फहमियाँ दूर नहीं होगी समाज में एकता की भावना का उदय कदापि नहीं हो सकता है। क्या आप बिना जाने समझे एक ऐसे धर्म से नफरत कर सकते हैं जो इंसान को उसके अपने पैदा करने वाले सच्चे पालनहार एक परमेश्वर की ओर बुल...

NPS Vs OPS : नई पेंशन स्कीम और पुरानी पेंशन स्कीम में 10 बड़े अंतर जानिए

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NPS Vs OPS  :  आजकल देश में  पुरानी पेंशन योजना को लेकर काफी चर्चा है। लाखों कर्मचारी  लाभ के लिए  आस लगाए बैठे हैं ।  हाल ही में उत्तर प्रदेश चुनाव से पुरानी पेंशन को फिर से जोर मिला है ।  वहीं, केंद्रीय कर्मचारियों को भी इसका इंतजार है ।  उम्मीद है कि सरकार कुछ केंद्रीय कर्मचारियों को New Pension Scheme (NPS) से Old Pension Scheme (OPS) में ला सकती है ।  इनमें वो कर्मचारी शामिल होंगे, जिनकी भर्ती के लिए विज्ञापन 31 दिसंबर 2003 को या उससे पहले जारी किए गए थे ।  सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद इसकी सुगबुगाहट शुरू हुई है ।    सन् 2005 में बंद हुई थी पुरानी पेंशन माह अप्रैल 2005 के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की केंद्र सरकार ने नियुक्तियों के लिए पुरानी पेंशन को बंद कर दिया था ।  नई पेंशन योजना लागू की गई थी ।  केंद्र सरकार के बाद नई पेंशन योजना लागू करने में राज्य भी पीछे नहीं रहे ।  हालांकि, ये अनिवार्य नहीं था ।  यूनियन का मानना है कि उस वक्त कर्मचारी इस नई पेंशन योजना को...

Cupped and his charges : सींगी (पक्षना) लगाने वाले की उजरत देना कैसा है?

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम : ताऊस ने हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत की रसूलुल्लाह सल्ल0 ने पक्षने लगवाए और सींगी लगाने वाले को उसकी उजरत दी और आप सल्ल0 ने नाक के ज़रिए से दवा ली। Ibn Abbas (Allah be pleased with them) reported that Allah's Messenger (SAW) got himself cupped and he paid the clipper his charges and he put medicine in his nostrils. (हवाला: सुनन अबू दाऊद: 3423, सहीह बुख़ारीः 2103, सहीह मुस्लिमः 4041)

Delhi Girl Hit and Dragged Case : अंजलि के साथ रोंगटे खड़े कर देने वाली दरिंदगी

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कंझावला, दिल्ली : नई दिल्ली के कंझावला इलाके में नए साल की सुबह एक भयानक घटना घटी, जब एक महिला को कार कुछ किलोमीटर तक घसीटते हुए ले गई। कार ने उसकी स्कूटी को टक्कर मार दी, जिससे लड़की की मौत हो गई और उसे 40 किमी तक घसीटते हुए ले गई। नए सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि लड़की अपने दोस्त के साथ यात्रा कर रही थी और दोस्त ने पुलिस को सूचित नहीं किया। अब दोस्त ने मीडिया के सामने आकर कहा है कि अंजलि नशे में थी और इसलिए वह अकेली चली गई जब समझ में नहीं आया कि जब अंजलि दुर्घटना का शिकार हो गई तो क्या करना है। घटना के पांच आरोपी शराब के नशे में थे और उन्हें अपराध के लिए गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है और लोगों में कोहराम मच गया है। अब दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंच गई है और सभी एंगल से हादसे का मुआयना कर रही है। गृह मंत्रालय ने इस मामले में तत्काल रिपोर्ट मांगी है।  #delhigirldrag #delhigirlaccident #delhiaccident #अंजलि वीडियो देखेंः

Calling the Times bad : ज़माने को बुरा कहना

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सवाल: हम आम तौर पर ज़माने को बुरा कहते हैं कि ज़माना ही ऐसा बुरा आ गया है, क्या ये कहना दुरूस्त है कि ज़माना बहुत बुरा आ गया है? जवाब: ज़माना-ए-जाहिलियत में जब मुशरिकीन-ए-अरब को कोई दुख, ग़म, शिद्दत व बला पहुंचती तो वो कहते: हाय ज़माने की बर्बादी! वो इन सब बातों को ज़माने की तरफ मंसूब करते और ज़माने को बुरा भला कहते और गालियां देते हालांकि इन कामों का ख़ालिक अल्लाह तआला है तो गोया उन्होंने अल्लाह तआला को गाली दी। इमाम इबने जरीर तबरी रह0 ने सूरह जासिया की तफसीर में हज़रत अबू हुरैरह रज़ि0 से जिक्र किया है रसूल अल्लाह सल्ल0 ने फ़रमायाः ‘‘अहले जाहिलियत कहते थे कि हमें रात और दिन हलाक करता है? वही हमें मारता और ज़िंदा करता है।’’ तो अल्लाह ने अपनी किताब में फ़माया: ‘‘उन्होंने कहा हमारी ज़िंदगी सिर्फ और सिर्फ दुनिया की ज़िंदगी है, हम मरते हैं और जीते हैं और हमें सिर्फ ज़माना ही हलाक करता है, दरअसल उन्हें उसकी ख़बर नहीं कि ये तो सिर्फ अटकल पच्चू से काम लेते हैं।’’ [तफ़सीर इब्ने कस़ीर : 4/159] इस आयत की तफ़सीर से मालूम होता हुआ कि ज़माने को बुरा भला कहना और अपनी मुश्किलात और दुखों को ज़माने की तरफ मंसूब करके उसे ब...

Anniversaries in Islam : क्या इस्लाम में सालगिरह मनाना जायज़ है?

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सवाल: क्या सालगिरह मनाना जायज़ है? जवाब: शादी या पैदाइश वगैरा की सालगिरह मनाना दीन-ए-इस्लाम में साबित नहीं है। रसूल-ए-करीम सल्ल0 की पैदाइश भी हुई और शादियां भी, इसी तरह आप सल्ल0 की बेटियों की शादियां भी हुईं लेकिन ये बात कहीं भी साबित नहीं कि आप सल्ल0 ने अपनी या अपनी औलाद की सालगिरह मनाई हो या अपने असहाब को सालगिरह मनाने का हुक्म दिया हो या  किसी सहाबी ने सालगिरह मनाई हो और आप सल्ल0 ने ख़ामोश रह कर उसे बरक़रार रखा हो, चुनांचे ये काम इस्लामी नहीं है। अगर इस्लाम में इसकी कोई अहमियत होती तो ज़रूर इसका कहीं तज़किरा होता लेकिन ईसाइयों वग़ैरा की देखा देखी मुसलमानों ने भी इसे मनाना शुरू कर दिया है। रसूल-ए-करीम सल्ल0 ने इरशाद फ़रमाया हैः ‘‘जिसने कोई ऐसा अमल किया जिस पर हमारा हुक्म नहीं तो वो मरदूद है।’’ लिहाज़ा सालगिरह मनाना दुरूस्त नहीं है। आडियो भी सुनेंः Your browser does not support the audio element.