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Recognize Jamaat-e-Islami Hind : جماعتِ اسلامی کو پہچانئے

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My dear friends, this post is very important for you because in this we are giving you very important information about Jamaat-e-Islamic Hind and about its bani, read it thoroughly and understand it. This article has been taken from the book Jamaat-e-Islami Ko Pehtaan authored by Hakim Ajmal Khan Sahab (Hafizahullah) and it has been written by Hafiz Abdul Tawwab Muhammadi Sahab (Hafizahullah) and the description of this book has been given by Janab Maulana Muhammad Asam As'ad Salafi Sahab Etawi (Hafizahullah). بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم ملک گیر سفر کرنے کے بعد مجھے اس چیز کا شدت سے احساس ہوا کہ اہلِ حدیث کی ایک بڑی تعداد جماعتِ اسلامی سے متاثر ہے اور اس خوشی میں مبتلا ہے کہ جماعتِ اسلامی اور اہل حدیث میں کوئی فرق نہیں ہے، حالانکہ جماعتِ اسلامی کے افکار و نظریات اور دینی تفہیم و تشریح علماء سلف سے قطعاً مختلف ہے، اس میں تجدد،اعتزال، تخفیفِ حدیث، اہانتِ صحابہ، مصلحت پرستی اور تشیع پسندی کے جراثیم موجود ہیں۔اس ضرورت نے راقم الحروف کو اس بات پر آمادہ کیا کہ اس موضوع پر ایک ایسی ...

Economics Rights of Women : महिलाओं के आर्थिक अधिकार (मुआशी हुकूक)

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Economics Rights of Women : अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रकातुहू! जैसा कि आप लोगों को पहले बताया जा चुका है कि दीन-ए-इस्लाम ने औरतों को कई अधिकारों (हुकूक) से नवाज़ा है। इससे पहले भी हम आप लोगों को कुछ हुकूक के बारे में बता चुके हैं, अब एक और अहम हक के बारे में समझाने की कोशिश कर रहे हैं जिसको जानना दोनों (मर्द व औरत) के लिए बहुत ज़रूरी है ताकि इस्लामी शरीअत के मुताबिक़ हम तमाम हुकूक को ज़िम्मेदारी से अदा कर सकें, अल्लाह तआला हम सभी को एक दूसरे के हुकूक अदा करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए, आमीन! • सबसे पहले हम ये जान लें कि निकाह में तय किया गया मेहर का अधिकार औरत की सम्पत्ति है जिसे अदा करना शौहर पर फर्ज़ है जैसा कि सूरह निसा की आयत नं0 4 में अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया है- “और औरतों को उनके मेहर (फ़र्ज़ समझ कर) खुशी-खुशी से अदा करो।” हां, अगर औरत अपनी खुशी व मर्जी से मेहर माफ करना चाहे तो कर सकती है जैसा कि इसी आयत में आगे अल्लाह तआला का इदशाद है कि “अगर औरतें अपनी खुशी से खुद मेहर का हिस्सा माफ़ कर दें तो उसे खुशी से खाओ।” और औरत अपने निजी माल में से खुद सदका व खैरात भी कर सकती है।...