ख़ुत्बा-ए-जुमा: अरबी के दो ख़ुत्बे जुमे की नमाज़ में ख़ुत्बा एक अहम हिस्सा है, जिसके ज़रिए इमाम साहब अल्लाह की हम्द-ओ-सना, उसकी याद और नसीहत के ज़रिए लोगों को दीन की बातें याद दिलाते हैं। इस पोस्ट में जुमे के दोनों ख़ुत्बों के अरबी अल्फ़ाज़ पेश किए गए हैं, जिन्हें ख़तीब साहब मिम्बर पर पढ़ते हैं। Khutbat E Juma First पहला ख़ुत्बा: जुमे की नमाज़ में इमाम साहब मिम्बर पर खड़े होकर पहले ख़ुत्बे की शुरुआत अल्लाह तआला की हम्द-ओ-सना, उससे मदद और मग़फ़िरत तलब करने तथा गवाही-ए-तौहीद व रिसालत के ज़िक्र से करते हैं। इसके बाद तक़वा, नेक अमल और दीन की नसीहत से जुड़ी बातें बयान की जाती हैं। پہلا خطبہ جمعہ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ ، بسم الله الرحمن الرحيم إِنَّ الْحَمْدَ لِلَّهِ نَحْمَدُهُ وَنَسْتَعِينُهُ وَنَسْتَغْفِرُهُ وَنَعُوْذُ بِاللَّهِ مِنْ شُرُوْرِ أَنْفُسِنَا وَ مِنْ سَيِّئَاتِ أَعْمَالِنَا مَنْ يَهْدِهِ اللهُ فَلَا مُضِلَّ لَهُ وَ مَنْ يُضْلِلْ فَلَا هَادِيَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنْ لَّا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُه...
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