ATM Story : पस यह सिद्ध हो गया कि उनका इलाज संभव है जिनको ज्ञान हो कि वो जाहिल हैं जबकि वे नहीं जानते, परन्तु ऐसे जाहिलों का कोई इलाज नहीं है जो अज्ञानता का शिकार होने के बाद भी खुद को बहुत बड़ा ज्ञानी मानते हैं। यानी उन्हें कदापि ये ज्ञान नहीं कि वे स्वयं अज्ञानी हैं। और वो इस ख़ुशफहमी के शिकार होते हैं कि कुछ भी ना जानने के बावजूद समझते हैं कि हमें सब कुछ आता है। संक्षेप में कहानी (ATM Story) इस प्रकार है, मैं एटीएम में पैसे निकालने के लिए गया था और अभी पैसे निकाल रहा था कि एक सज्जन अंदर आते हैं। मैंने उनसे कहा कि आपने अंदर आने की जहमत क्यों उठाई, सर। उन्होंने कहा, ‘‘क्या आपको कोई कठिनाई है?’’ हमने आश्चर्य से जवाब दिया, ‘‘हाँ, बिल्कुल कठिनाई है। मैं यहाँ अंदर मौजूद हूँ और आप फिर भी अंदर आ गए। फिर उस सज्जन ने मुझे आश्चर्य के समुद्र में ढकेलते हूए कहा, ‘‘अंदर दो लोगों का परमीशन है।’’ मैंने बड़ी मुश्किल से आश्चर्य के संमुद्र में डूबने से खुद को बचाया, और जब मैं धैर्य की नाव चलाकर किनारे लगा, तो मैंने कहा, ‘‘सर, क्या आप ठीक तो हैं? ये आपसे किसने कह दिया कि अंदर दो व्यक्ति की परमीशन है।’’ ...