Backbiting : अज़ीज़ भाईयों और बहिनों! आज समाज में ग़ीबत करना बहुत आम हो गया है, जहाँ घर में दो औरतें हों, मुहल्ले और गलियों में दो तीन मर्द हों तो फिर समझ लो कि वो किसी तीसरे की ग़ीबत करते नज़र आ जायेंगे और लोग इस गुनाह को गुनाह तसव्वुर ही नहीं करते हैं जबकि ये भी एक कबीरा गुनाह है जैसा कि अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद में इरशाद फ़रमायाः ‘‘तुममें से कोई किसी की ग़ीबत न करे। क्या तुममें से कोई व्यक्ति यह पसन्द करता है कि अपने मुर्दा भाई का गोश्त खाए तुम इससे ज़रूर नफ़रत करोगे, अतः अल्लाह से डरो अल्लाह तआला निश्चय ही तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान है।’’ (सूरह हुजुरात, आयत 12) ग़ीबत किसे कहते हैं? ग़ीबत की वज़ाहत करते हुए आप सल्ल0 ने फ़रमायाः ‘‘ग़ीबत यह है कि तू अपने भाई का ज़िक्र इस तरह करे जो उसे नापसन्द हो।’’ सहाबी ने अर्ज़ किया ‘‘अगर वह बात उसमें मौजूद हो तो फिर?’’ आप सल्ल0 ने इरशाद फ़रमायाः ‘‘अगर उसमें मौजूद है तब वह ग़ीबत है और अगर मौजूद न हो तब वह बोहतान है।’’ (मुस्लिम, अबू दाऊद, तिर्मिज़ी, नसाई) ग़ीबत के बारे में रसूले अकरम सल्ल0 के कुछ इरशादातग़ीबत, ज़िना से भी सख़्त गुनाह है। सहाबा किराम रज़ि0 ने अर्ज़ किया...
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