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Khutbat E Juma in Etawah for 26 April 2024: उर्दू/हिन्दी/अंग्रेज़ी इश्तिहार दिनांक 26 अप्रैल 2024 दिन जुमा

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     Khutba e Juma for Etawah City, English List, 26 (16 Shawwal 1445 Hijri) Sr. No. Lecturer Place Timings 1 Janab Hafiz Abdullah Asri Sahab ( حفظه الله ) Shahi Jama Masjid, Baah Adda, Etawah 12:30 To 01:00 PM 2 Janab Hafiz Israr Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Ahle Hadees, Mehtar Tola, Etawah 12:30 To 01:00 PM 3 Janab Molana Abdul Hannan Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Muhammadia, Bagiya Mohallah, Etawah 12:30 To 01:00 PM 4 Janab Muhammad Zubair Sahab Etawi ( حفظه الله ) Tile Wali Masjid, Shahgran, Etawah 12:45 To 01:15 PM 5 Janab Muhammad Masroor Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid e Aqsa, Nai Basti Shahgran, Etawah 12:30 To 01:00 PM 6 Janab Molana Riyazuddin Sahab Sanabili Etawi ( حفظه الله ) Masjid e Tauheed, Tane Wali, Nai Basti, Etawah 12:30 To 01:00 PM 7 Janab Molana Muhammad Ashraf Sahab Salafi Etawi ( حفظه الله ) Masjid Darul Hamd, Ansari Colony, Abu Dhabi Etawah 12:30 To 01:00 PM 8 Janab Muhammad Naeem Sahab Etawi ( حفظه الله ) Madina Masjid, Langhai Tola, Etawa...

मगर दीन वही मंजुर है जो आलिम ने बताया है भले ही वो गलत हो

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हर एक शख्स अपनी ज़रूरत का सामान खरीदने के लिए 10 (दस) दुकानों में जाकर खोजता  है मगर दीन वही मंज़ूर है जो आलिम ने बताया है भले ही वो गलत हो यही हाल यहूदी और ईसाइयों का था  ◆उन्होंने अल्लाह को छोड़कर अपने अपने उलेमा और दरवेशों को रब्ब बना लिया है ( क़ुरआन : सुरह: तौबा सुरह: नं0 9 आयत नं0 31) इस आयत की तफ़्सीर  में हदीस ◆इस आयत को सुनकर  इब्ने हातिम र.अ. ने नबी ﷺ से फरमाया यहूदी और नसारा (ईसाई) ने अपने उलेमा की कभी इबादत नही की फिर ये क्यों कहा गया के उन्होंने अपने उलेमा को रब्ब बना लिया ? नबी ﷺ ने कहा उनके उलेमा ने जिस चीज़ को हलाल करार दिया उसको उन्होंने हलाल ,और जिस चीज़ को हराम कर दिया,उसको हराम ही समझा यही इनकी इबादत है. ( तिर्मिज़ी हदीस नं0 3095) (यानि किसी चीज को हलाल और हराम करने का अधिकार सिर्फ अल्लाह को है) आज उम्मत यकीनन यहूदी नसारा ( ईसाइ ) की नक़्शे कदम पर चल रही है इसकी दलील ये हदीस है  ◆नबी ﷺ फरमाया तुम पहले की उम्मतों की पैरवी करोगी सहाबी रसूल ने कहा इससे मुराद कही यहूदी और नसारा ( ईसाई ) तो नही नबी ﷺ कहा बिल्कुल (सही बुखारी हदीस नं07320) आज ...

Nikaah - नये जोड़े को दुआ और तोहफा देना

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नये जोड़े को दुआ देना *हजरत अबू हुरैरह रज़ि कहते हैं कि जब नबी ﷺ किसी शख्स को शादी की मुबारकबाद देते तो आप कहते,अल्लाह तआला तुम्हें बरकत दे और इस बरकत को कायम रखे और तुम दोनों (मियाँ-बीवी) को खैर और भलाई में इकठ्ठा कर दे।"* *[अबू दाऊद- 2130]* जब हजरत अब्दुर्रहमान बिन औफ़ रज़ि ने अपने निकाह की खबर नबी ﷺ. को दी तो आपने फरमाया: ‎"بَارَكَ اللَّهُ لَكَ" तर्जुमा: "अल्लाह तआला तुम्हें (इस निकाह में) बरकत दे।"  *[सहीह बुखारी 5155, 6386; सहीह मुस्लिम  3490]* Note: अब यहां बयान की गई हदीस से पता चलता है कि निकाह के बाद नए जोड़े को बरकत की दुआ सुन्नत ए नबी है। दौर ए जहलियत का जमाना ऐसा था की लोग अंधेरे में भटक रहे थे लोग जब नए जोड़े को दुआ देते तो कहते, "तुम दोनों में मेल मिलाप हो, और बेटे पैदा हों" इसकी वजह ये थी कि न केवल अरब में बल्कि दुनियां के तमाम मुल्कों में लोग बेटियों को बोझ समझते थे उन से नफ़रत करते थे। ऐसे माहौल में नबी करीम ﷺ बेटियों को जीने का हक़ दिलाया और नए जोड़े को दुआ देने के अल्फाज़ सिखाए जिसमें दीन और दुनियां दोनों में खैर और भलाई हास...

Special on Ambedkar Jayanti: समानता एवं बराबरी

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अम्बेडकर जयंती पर विशेष.... सर्वशक्तिमान अल्लाह की नज़र में सभी लोग समान हैं, भले ही वे सभी एक-दूसरे के समान न हों। रूप-रंग, धन-संपदा, महत्वाकांक्षाएँ, योग्यताएँ इत्यादि आदि में भिन्नताएँ होती हैं। हालाँकि, इनमें से कोई भी अंतर स्वयं एक व्यक्ति की दूसरे पर श्रेष्ठता की स्थिति स्थापित नहीं कर सकता है। इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरान निर्दिष्ट करती है कि सम्पूर्ण मानव समुदाय  और महिलाएं दोनों आध्यात्मिक रूप से समान हैं, किसी के साथ कोई भेद नहीं है। "जो अच्छे कर्म करेगा, चाहे पुरुष हो या स्त्री, यदि वह ईमान वाला है तो ऐसे लोग जन्नत में दाख़िल होंगे। और उनका हक़ रत्ती भर भी मारा नहीं जाएगा।" (कुरान 4:124) सारे संसार के रचनाकार स्वामी ने अपनी किसी भी रचना में किसी के साथ कोई भेद नहीं किया है, हर चीज़ का अपना महत्व है और हर चीज़ के बिना जीवन शून्य है, सर्दी गर्मी सब को एक जैसी लगती है, बारिश सभी को भिगोती है, सूरज और चांद सब को समान रोशनी देता है, हवा जल भोजन सब कुछ एक जैसा समान नियम, सभी मां के गर्भ से जन्म लेते है, कोई भेद नहीं है, इंसान के श्रेष्ठता का पैमाना उसके कर्म है, जो अच्छे ...

जादू शैतान का काम: Magic Devil's Work

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अगर कोई आदमी ये कहे कि जादूगर सितारों के नाम लेकर उनसे मुख़ातिब होते हुए नज़र आते हैं और इसके बाद उनका जादू मुकम्मल होता है, तो इसका जवाब ये है कि ये चीज़ जादू की तासी़र की वजह से नहीं शैतानों की तास़ीर की वजह से होती है, क्योंकि ख़ुद शैतानों ने जादूगरों को ये तालीमात दे रखी होती हैं कि वो सितारों को पुकारा करें, चुनांचे वो जब ऐसा करते हैं तो खुद शैतान जादू के सिलसिले में उनकी मदद करते हैं, लेकिन उसका पता जादूगरों को नहीं लगने देते।  कुछ जादूगर इस मक़सद के लिए क़ुरआन मजीद को अपने पावों से बांधकर बैतुलख़ला में जाते और कुछ कुरआन मजीद की आयात को गन्दगी से लिखते हैं, कुछ उन्हें हैज़ के ख़ून से लिखते हैं, कुछ क़ुरआनी आयात को अपने पावों के निचले हिस्सों पर लिखते हैं। कुछ जादूगर सूरह: फ़ातिहा को उल्टा लिखते हैं और कुछ बग़ैर वुज़ू के नमाज़ पढ़ते हैं और कुछ हमेशा हालत ए जनाबत में रहते हैं और कुछ जादूगरों को शैतान के लिए जानवर ज़िबह करने पड़ते हैं और वो भी बिस्मिल्लाह पढ़े बग़ैर और ज़िबह शुदा जानवरों को ऐसी जगह पर फ़ैंकना पड़ता है जिसको ख़ुद शैतान तय करता है।

Ramadan 30 Wednesday 10 April 2024 Sahr o Iftar Timings for Etawah

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सच्ची बातें अनमोल बातें - आज की हदीस़ अब्दुल्लाह बिन यूसुफ़ ने बयान किया, उन्होंने कहा कि हमको इमाम मालिक रह0 ने ख़बर दी, उन्हों इब्ने शिहाब ने, उन्होंने कहा कि हमसे इब्ने अज़हर के ग़ुलाम अबू उबैद ने बयान किया कि- ईद के दिन में उमर-बिन-ख़त्ताब रज़ि0 की खि़दमत में हाज़िर था। आप सल्ल0 ने फ़रमया, ये दो दिन ऐसे हैं जिनके रोज़ों की आंहज़रत सल्ल0 ने मनाही फ़रमाई है। रमज़ान के रोज़ों के बाद इफ़्तार का दिन (ईदुल-फ़ित्र) और दूसरा वो दिन जिसमें तुम अपनी क़ुरबानी का गोश्त खाते हो (यानी ईदुल-अज़हा का दिन)। Reference: - Book: Sahih Bukhari, Hadees No. # 1990, Status: Sahih

Ramadan 29 Tuesday 09 April 2024 Sahr o Iftar Timings for Etawah

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  सच्ची बातें अनमोल बातें - आज की हदीस़ सुलेमान बिन हर्ब ने बयान किया, कहा हमसे शोअबा ने, उन्होंने अदी बिन स़ाबित से, उन्होंने सईद बिन ज़ुबैर से, उन्होंने इब्ने अब्बास रज़ि0 अन्हुमा से कि - आंहज़रत सल्ल0 ने ईदुल-फ़ित्र के दिन दो रकअतें पढ़ीं न उन से पहले कोई नफ़ल पढ़ी न उस के बाद। फिर (ख़ुतबा पढ़ कर) आप (सल्ल0) औरतों के पास आए और बिलाल आप के साथ थे। आप (सल्ल0) ने औरतों से फ़रमाया ख़ैरात करो। वो ख़ैरात देने लगीं। कोई अपनी बाली पेश करने लगी कोई अपना हार देने लगी। Reference: - Book: Sahih Bukhari, Hadees No. # 964, 975, 989, Status: Sahih

Ramadan 28 Monday 08 April 2024 Sahr o Iftar Timings for Etawah

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  सच्ची बातें अनमोल बातें - आज की हदीस़ सहल बिन साअदी रज़ि0 से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल0) नेे फ़रमाया, जन्नत का एक दरवाज़ा है जिसे रय्यान कहते हैं, क़ियामत के दिन इस दरवाज़े से सिर्फ़ रोज़ेदार ही जन्नत में दाखि़ल होंगे उन के सिवा और कोई उसमें से नहीं दाखि़ल होगा पुकारा जाएगा कि रोज़ेदार कहाँ हैं? वो खड़े हो जाएँगे उन के सिवा उस से और कोई नहीं अन्दर जाने पाएगा और जब ये लोग अन्दर जाने चले जाएँगे तो ये दरवाज़ा बन्द कर दिया जाएगा फिर उससे कोई अन्दर न जा सकेगा। Reference: - Book: Sahih Bukhari, Hadees No. # 1896, Status: Sahih

Ramadan 27 Sunday 07 April 2024 Sahr o Iftar Timings for Etawah

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  सच्ची बातें अनमोल बातें - आज की हदीस़ मुसद्दद ने बयान किया, कहा हमसे बिश्र बिन मुफ़ज़्ज़ल ने बयान किया, उनसे हुमैद ने बयान किया, उनसे अनस रज़ि0 ने बयान किया कि मुझसे उबादा-बिन सामित रज़ि0 ने कहा- नबी करीम (सल्ल0) लोगों को शबे-क़द्र की ख़ुशख़बरी देने के लिए हुजरे से बाहर तशरीफ़ लाए लेकिन मुसलमानों के दो आदमी उस वक़्त आपस में किसी बात पर लड़ने लगे। आप (सल्ल0) ने फ़रमाया कि मैं तुम्हें (शबे-क़द्र के मुताल्लिक़) बताने के लिए निकला था लेकिन फुलाँ-फुलाँ आपस में लड़ने लगे अैर मेरे इल्म से वो उठा ली गई। मुमकिन है कि यही तुम्हारे लिए अच्छा हो। अब तुम उसे 29 और 27 और 25 रमज़ान की रातों में तलाश करो। Reference: - Book: Sahih Bukhari, Hadees No. # 6049, Status: Sahih

Ramadan 26 Saturday 06 April 2024 Sahr o Iftar Timings for Etawah

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  सच्ची बातें अनमोल बातें - आज की हदीस़ उरवह बिन ज़ुबैर ने बयान किया कि हज़रत आईशा रज़ि0 ने उन्हें ख़बउ दी कि रसूलुल्लाह (सल्ल0) ग्यारह रकअतें (वित्र और तहज्जुद की) पढ़ते थे आप (सल्ल0) की यही नमाज़ थी। मुराद उन की रात की नमाज़ थी। आप (सल्ल0) का सजदा उन रकअतों में इतना लम्बा होता था कि सिर उठाने से पहले तुममें से कोई शख़्स भी पचास आयतें पढ़ सकता और फ़ज्र की नमाज़ फ़र्ज़ से पहले आप (सल्ल0) सुन्नत दो रकअतें पढ़ते थे उसके बाद (ज़रा देर) दाहिने पहलू पर लेट रहते यहाँ तक कि मुअजि़्ज़न बुलाने के लिये आप (सल्ल0) के पास आता। Reference: - Book: Sahih Bukhari, Hadees No. # 994, Status: Sahih

Khutbat E Juma in Etawah for 5 April 2024: उर्दू/हिन्दी/अंग्रेज़ी इश्तिहार दिनांक 5 अप्रैल 2024 दिन जुमा

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    Khutba e Juma for Etawah City, English List, Friday, 5 April 2024 (25 Ramadan 1445 Hijri) Sr. No. Lecturer Place Timings 1 Janab Hafiz Muhammad Hasnain Sahab Etawi ( حفظه الله ) Shahi Jama Masjid, Baah Adda, Etawah 12:30 To 01:00 PM 2 Janab Hafiz Israr Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Ahle Hadees, Mehtar Tola, Etawah 12:30 To 01:00 PM 3 Janab Molana Abdul Hannan Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Muhammadia, Bagiya Mohallah, Etawah 12:30 To 01:00 PM 4 Janab Molana Abdurrehman Sahab Etawi ( حفظه الله ) Tile Wali Masjid, Shahgran, Etawah 12:45 To 01:15 PM 5 Janab Muhammad Masroor Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid e Aqsa, Nai Basti Shahgran, Etawah 12:30 To 01:00 PM 6 Janab Molana Riyazuddin Sahab Sanabili Etawi ( حفظه الله ) Masjid e Tauheed, Tane Wali, Nai Basti, Etawah 12:30 To 01:00 PM 7 Janab Muhammad Zubair Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Darul Hamd, Ansari Colony, Abu Dhabi Etawah 12:30 To 01:00 PM 8 Janab Muhammad Naeem Sahab Etawi ( حفظه الله ) Madina Masjid, Langhai T...

Ramadan 25 Friday 05 April 2024 Sahr o Iftar Timings for Etawah

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  सच्ची बातें अनमोल बातें - आज की हदीस़ हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ि0 अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल0) ने उन से फ़रमाया कि सब नमाज़ों में अल्लाह तआला के नज़दीक पसन्दीदा नमाज़ दाऊद (अलैहि0) की नमाज़ है और रोज़ों में भी दाऊद (अलैहि0) ही का रोज़ा। आप आधी रात तक सोते उसके बाद तिहाई रात नमाज़ पढ़ने में गुज़ारते। फिर रात के छटे हिस्से में भी सो जाते। इसी तरह आप एक दिन रोज़ा रखते और एक दिन इफ़्तार करते थे।  Reference: - Book: Sahih Bukhari, Hadees No. # 1131, Status: Sahih

Ramadan 24 Thursday 04 April 2024 Sahr o Iftar Timings for Etawah

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  सच्ची बातें अनमोल बातें - आज की हदीस़ इस्हाक़ ने बयान किया, कहा हमसे अब्दुल रज़्ज़ाक़ ने बयान किया, कहा हमसे मामर ने बयान किया, उनसे हम्माम ने और उनसे हज़रत अबू हुरैरह रज़ि0 ने बयान किया कि- रसूलुल्लाह (सल्ल0) ने फ़रमाया, ‘‘क़ियामत के दिन तुममें से किसी का ख़ज़ाना चितकबरा अज़दहा बन कर आएगा, उसका मालिक उससे भागेगा लेकिन वे उसे तलाश कर रहा होगा और कहेगा कि मैं तुम्हारा ख़ज़ाना हूँ। फ़रमाया ‘‘अल्लह की क़सम वो मुसलसल तलाश करता रहेगा यहाँ तक कि वो शख़्स अपना हाथ फेला देगा और अज़दहा उसे लुक़मा बनाएगा।’’ Reference: - Book: Sahih Bukhari, Hadees No. # 6957, Status: Sahih

Shab E Qadr ki Dua in Hindi Urdu and Arabic - लइलतुल क़द्र की दुआ

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शब  ए क़द्र  की दुआ اَللّٰہُمَّ اِنَّکَ عَفُوّتُحِبُّ الْعَفْوَفَاعْفُ عَنِّیْ اے اللہ !تو بہت معاف فرمانے والا ہے ،معافی کو پسند فرماتا ہے لہذا مجھے معاف فرمادے۔ उम्मुल मोमिनीन आईशा रज़ियल्लाहु अन्हा कहती हैं कि मैंने कहाः अल्लाह के रसूल (सल्ल0)! अगर मुझे मालूम हो जाए कि कौन सी रात लइलतुल क़द्र है तो मैं उसमें क्या पढ़ूँ? आप ने फ़रमायाः ‘‘पढ़ो <<अल्लाहुम्मः इन्नकः अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़वा फ़अफ़ु अन्नी>> ’’ ऐ अल्लाह! तू अफ़ू व दरगुज़र करने वाला मेहरबान है, और अफ़ू व दरगुज़र करने को पसन्द करता है, इस लिए तू हमें माफ़ व दरगुज़र कर दे।’’ इमाम तिर्मिज़ी कहते हैं: ये हदीस हसन सहीह है। Reference: Sunan Tirmidhi Hadees No. 3513, Status: Hasan Sahih

Ramadan 23 Wednesday 03 April 2024 Sahr o Iftar Timings for Etawah

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सच्ची बातें अनमोल बातें - आज की हदीस़ यहया बिन सुलेमान ने बयान किया, उन्होंने कहा कि हमसे अब्दुल्लाह बिन वहब ने बयान किया, उन्हेंने कहा कि हमें अम्र बिन हारिस ने ख़बर दी, उनसे अब्दुर्रहमान बिन क़ासिम ने अपने बाप क़ासिम से बयान किया और उनसे हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि0 ने बयान किया कि- रसूलुल्लाह (सल्ल0) ने फ़रमाया, रात की नमाज़ें दो दो रकअतें हैं और जब तू ख़त्म करना चाहे तो एक रकअत वित्र पढ़ ले जो सारी नमाज़ को ताक़ बना देगी। क़ासिम-बिन-मुहम्मद ने बयान किया कि हमने बहुत-सों को तीन रकअत वित्र पढ़ते भी पाया है और तीन या एक (रकअत वित्र) सब जायज़ और मुझको उम्मीद है किसी में क़बाहत न होगी। Reference: - Book: Sahih Bukhari, Hadees No. # 993, Status: Sahih

Ramadan 22 Tuesday 02 April 2024 Sahr o Iftar Timings for Etawah

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  सच्ची बातें अनमोल बातें - आज की हदीस़ मुहम्मद बिन अब्दिल्लाह बिन मुसन्ना ने बयान किया, उन्होंने कहा कि मुझसे मेरे वालिद ने बयान किया, उन्होंने कहा कि मुझसे सुमामा बिन अब्दिल्लाह बिन अनस ने बयान किया, उनसे अनस रज़ि0 ने बयान किया कि- अबू-बक्र (रज़ि0) ने उनके लिये फ़र्ज़ ज़कात का बयान तहरीर किया था जो रसूूलुल्लााह (सल्ल0) ने मुक़र्रर की थी। आप (सल्ल0) ने फ़रमाया कि जब किसी माल में दो आदमी साझी हों तो वो ज़कात में एक दूसरे से बराबर-बराबर मुजरा कर लें (यानी ज़कात की रक़म आपस में बराबर तक़सीम कर लें)। Reference: - Book: Sahih Bukhari, Hadees No. # 2487, Status: Sahih