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उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा: ईमान, सब्र और एक महान माँ की कहानी

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उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा इस्लामी इतिहास की उन महान महिलाओं में से हैं, जिनकी ज़िंदगी ईमान, हिकमत, सब्र और बेहतरीन तर्बियत की मिसाल है। उनकी ज़िंदगी में हमें यह सीख मिलती है कि एक महिला अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहते हुए अपने परिवार और आने वाली नस्लों के लिए कितना बड़ा किरदार अदा कर सकती है। उनकी ज़िंदगी का एक मशहूर वाक़िया उनके निकाह से जुड़ा हुआ है। जब अबू तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु ने उनके लिए निकाह का पैग़ाम भेजा, उस समय वह मुसलमान नहीं थे। रिश्ता अच्छा था और अबू तल्हा एक बाक़रदार शख़्स थे, लेकिन उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा के लिए सबसे अहम सवाल था: क्या हम दोनों का रास्ता एक है? उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा का मेहर क्या था? उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा ने अबू तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु से कहा: “मैं मुसलमान हूँ और तुम मुसलमान नहीं हो, इसलिए मेरे लिए तुमसे निकाह जायज़ नहीं। अगर तुम इस्लाम क़ुबूल कर लो तो वही मेरा मेहर होगा।” उन्होंने न सोना माँगा और न चाँदी। उनके लिए दुनिया की दौलत से बढ़कर ईमान था। चुनाँचे अबू तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु इस्लाम ले आए और यही उनका ...

Ramadan 2025: Etawah Sehri & Iftar Time Table - इटावा रमज़ान सेहरी और इफ्तार का वक्त

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Guidelines for Speech and Quran Recitation: तक़रीर और तिलावत में गाने की शैली से दूरी और आवाज में मिठास पैदा करने का हुक्म

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Guidelines for Speech and Quran Recitation   **बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम** पैग़ंबर मुहम्मद (ﷺ) ने फरमाया:  "اقرؤوا القرآن ‌بلحون ‌العرب وأصواتها وإياكم ولحون أهل العشق ولحون أهل الكتابين" (क़ुरआन को अरबी के लहजे और आवाज़ में पढ़ो और गानों की शैली या यहूद-नासारा के लहजे से बचो।) (लेखक- शकील अहमद अब्दुल हई) तक़रीर और तिलावत में ऐसा तरन्नुम जो गाने का तरीक़ा और रूप अपना ले, वह चाहे तक़रीर हो, शेर-ओ-शायरी या क़ुरआन मजीद की तिलावत हो, ममनू और हराम है। लेकिन अगर क़ारी, मुक़र्रिर और शायर की आवाज़ तसन्नुअत और बनावट से दूर अपने असली स्वर के बहाव में मिठास पैदा करती है, तो यह चीज़ शरीअत में मक़्सूद है। क़ुरआन मजीद की तिलावत के वक़्त लह्न और तरतील का ख़्याल रखना, हर अल्फ़ाज़ को उसका हक़ देना, जिससे दिलों में बलीग़ असर पैदा हो, शरइ तौर पर मक़्सूद है। अपनी आवाज़ में ख़ूबसूरती पैदा करना, जो ममनूअत की हद को पार न करे, बल्कि हुस्न-ए-स्वर पैदा हो, खुशूअ और ख़ुजूअ, तदब्बुर-फ़िल-क़ुरआन, रग़बत-ए-समाअत और हुस्न-ए-फहम के इसबाब में से है। क़ुरआन को ऐसी आवाज़ में पढ़ना, जिससे दिलों में लज़त और चाशनी महसूस हो (...

Khutbat E Juma in Etawah for 10 May 2024: उर्दू/हिन्दी/अंग्रेज़ी इश्तिहार दिनांक 10 मई 2024 दिन जुमा

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Khutbat E Juma in Etawah for 3 May 2024: उर्दू/हिन्दी/अंग्रेज़ी इश्तिहार दिनांक 3 मई 2024 दिन जुमा

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     Khutba e Juma for Etawah City, English List, Friday 3 May 2024 (23 Shawwal 1445 Hijri) Sr. No. Lecturer Place Timings 1 Janab Molana Arshad Mukhtar Sahab Mumbai ( حفظه الله ) Shahi Jama Masjid, Baah Adda, Etawah 12:30 To 01:00 PM 2 Janab Hafiz Israr Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Ahle Hadees, Mehtar Tola, Etawah 12:30 To 01:00 PM 3 Janab Molana Abdul Hannan Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Muhammadia, Bagiya Mohallah, Etawah 12:30 To 01:00 PM 4 Janab Abdul Samad Sahab Etawi ( حفظه الله ) Tile Wali Masjid, Shahgran, Etawah 12:45 To 01:15 PM 5 Janab Muhammad Masroor Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid e Aqsa, Nai Basti Shahgran, Etawah 12:30 To 01:00 PM 6 Janab Molana Riyazuddin Sahab Sanabili Etawi ( حفظه الله ) Masjid e Tauheed, Tane Wali, Nai Basti, Etawah 12:30 To 01:00 PM 7 Janab Muhammad Zubair Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Darul Hamd, Ansari Colony, Abu Dhabi Etawah 12:30 To 01:00 PM 8 Janab Muhammad Naeem Sahab Etawi ( حفظه الله ) Madina Masjid, Langhai Tola,...

Khutbat E Juma in Etawah for 26 April 2024: उर्दू/हिन्दी/अंग्रेज़ी इश्तिहार दिनांक 26 अप्रैल 2024 दिन जुमा

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     Khutba e Juma for Etawah City, English List, 26 (16 Shawwal 1445 Hijri) Sr. No. Lecturer Place Timings 1 Janab Hafiz Abdullah Asri Sahab ( حفظه الله ) Shahi Jama Masjid, Baah Adda, Etawah 12:30 To 01:00 PM 2 Janab Hafiz Israr Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Ahle Hadees, Mehtar Tola, Etawah 12:30 To 01:00 PM 3 Janab Molana Abdul Hannan Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid Muhammadia, Bagiya Mohallah, Etawah 12:30 To 01:00 PM 4 Janab Muhammad Zubair Sahab Etawi ( حفظه الله ) Tile Wali Masjid, Shahgran, Etawah 12:45 To 01:15 PM 5 Janab Muhammad Masroor Sahab Etawi ( حفظه الله ) Masjid e Aqsa, Nai Basti Shahgran, Etawah 12:30 To 01:00 PM 6 Janab Molana Riyazuddin Sahab Sanabili Etawi ( حفظه الله ) Masjid e Tauheed, Tane Wali, Nai Basti, Etawah 12:30 To 01:00 PM 7 Janab Molana Muhammad Ashraf Sahab Salafi Etawi ( حفظه الله ) Masjid Darul Hamd, Ansari Colony, Abu Dhabi Etawah 12:30 To 01:00 PM 8 Janab Muhammad Naeem Sahab Etawi ( حفظه الله ) Madina Masjid, Langhai Tola, Etawa...

मगर दीन वही मंजुर है जो आलिम ने बताया है भले ही वो गलत हो

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हर एक शख्स अपनी ज़रूरत का सामान खरीदने के लिए 10 (दस) दुकानों में जाकर खोजता  है मगर दीन वही मंज़ूर है जो आलिम ने बताया है भले ही वो गलत हो यही हाल यहूदी और ईसाइयों का था  ◆उन्होंने अल्लाह को छोड़कर अपने अपने उलेमा और दरवेशों को रब्ब बना लिया है ( क़ुरआन : सुरह: तौबा सुरह: नं0 9 आयत नं0 31) इस आयत की तफ़्सीर  में हदीस ◆इस आयत को सुनकर  इब्ने हातिम र.अ. ने नबी ﷺ से फरमाया यहूदी और नसारा (ईसाई) ने अपने उलेमा की कभी इबादत नही की फिर ये क्यों कहा गया के उन्होंने अपने उलेमा को रब्ब बना लिया ? नबी ﷺ ने कहा उनके उलेमा ने जिस चीज़ को हलाल करार दिया उसको उन्होंने हलाल ,और जिस चीज़ को हराम कर दिया,उसको हराम ही समझा यही इनकी इबादत है. ( तिर्मिज़ी हदीस नं0 3095) (यानि किसी चीज को हलाल और हराम करने का अधिकार सिर्फ अल्लाह को है) आज उम्मत यकीनन यहूदी नसारा ( ईसाइ ) की नक़्शे कदम पर चल रही है इसकी दलील ये हदीस है  ◆नबी ﷺ फरमाया तुम पहले की उम्मतों की पैरवी करोगी सहाबी रसूल ने कहा इससे मुराद कही यहूदी और नसारा ( ईसाई ) तो नही नबी ﷺ कहा बिल्कुल (सही बुखारी हदीस नं07320) आज ...