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नवंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Best Sher : इस लिए तस्वीर जानां हमने बनवायी नहीं

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  एक बादशाह के सामने चार आदमी बैठे थे: (1) अंधा (2) फ़क़ीर (3) आलिम (4) आशिक़ बादशाह ने ये मिसरा कह दियाः  ‘‘इस लिए तस्वीर जानां हमने बनवायी नहीं’’  और सबको हुक्म दिया कि इस से पहले मिसरा लगाकर शेर पूरा करो। अंधे ने कहा:  ‘‘इसमें गोयायी नहीं और मुझमें बीनायी नहीं,  इस लिए तस्वीर जानां हमने बनवायी नहीं’’ फ़क़ीर ने कहाः  ‘‘मांगता पैसे मुसव्विरजेब में पाई नहीं,  इस लिए तस्वीर जानां हमने बनवायी नहीं’’ आलिम ने कहाः  ‘‘बुत परस्ती दीन-ए-अहमद में कभी आई नहीं,  इस लिए तस्वीर जानां हमने बनवायी नहीं’’ आशिक़ ने तो कमाल की हद कर दी...कहाः  ‘‘एक से जब दो हुए फिर लुफ्त यकताई नहीं,  इस लिए तस्वीर जानां हमने बनवायी नहीं’’

Motivational Story: अम्मी फ़रिश्ता आ गया

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दोस्तों! आज की ये पोस्ट आपको रूला देगी, क्योंकि इसमें एक ऐसे परिवार के संबंध में क़िस्सा तहरीर किया गया है जो ग़रीबी की मार से जूझ रहा था, इस पोस्ट को आप पूरा ज़रूर पढ़ लीजिए, हो सकता है हमें इससे बड़ी सीख मिल जाए, तो चलिए अब शुरू करते हैंः ये दिसम्बर 2011 की बात है आज मुझे अपनी ज़िंदगी की पहली कमाई मिलने वाली थी । तीन महीने की तनख्वाह एक साथ मिली और साथ मे छुट्टी भी मिल गई। घर पहुंचा तो ईद का समां था। माँ- बाप,भाई,बहन, सब बहुत खुश थे। मैंने सारी रक़म वालिदा के हाथ पर रख दी। वालिदा ने रक़म का तीसरा हिस्सा अल्लाह की राह में खर्च करने की नीयत से अलग किया और कहा कि इस रक़म से एक बेवा औरत के घर राशन ख़रीदकर पहुंचा देना जो दूर एक मुहल्ले में रहती थीं। मैं उसी वक़्त गया और राशन ख़रीद कर लाया । घर मे मेरे लिए पुरतकल्लुफ़ खाने का इंतेज़ाम किया गया था। बहन,भाइयों के साथ मिलकर लज़ीज़ खानों के मज़े उड़ाए और सफर की थकावट दूर करने की गरज़ से रज़ाई में घुस गया। आंखें नींद से बोझल हो रही थीं कि अचानक उस बेवा औरत और उसके यतीम बच्चों का ख़्याल आया। इरादा किया कि अभी जाऊं और सामान पहुंचा दूँ ,तबियत में सुस्ती थी सोचा कल पहु...

A muslim women feeds around 400 dogs and cats everyday : एक मुस्लिम ख़ातून की एक दिलचस्प मिसाल

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दोस्तों! समाजी खि़दमात अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि इससे दिल को सुकून मिलता है और  लोगों  की मदद होती है, और खि़दमत करने वाले को ईश्वर बहुत बड़ा इनाम देगा। हमें हर किसी के काम आना चाहिए, अब चाहे वो इंसान हो या जानवर, आखि़र है तो अल्लाह की मख़लूक, हमें सबकी खि़दमत करना चाहिए। इसी की एक अहम मिसाल हम आपकी खि़दमत में पेश कर रहे हैं। क्राउड फंडिंग की एक मशहूर वेबसाइट पर एक ऐलान ने अपनी तरफ मुतवज्जा कियाः  ‘‘मेरी मदद करें ताकि मैं एक मुस्लिम ख़ातून की माली मदद कर सकूं जो रोज़ाना क़रीब चार सौ बिल्लियों और कुत्तों को खाना खिलाती है।’’ इस सुर्खी के नीचे तफसील कछ इस तरह थीः ‘‘लाॅकडाउन शुरू होने के बाद, मैं और मेरे दोस्त ने शाम को टहलना शुरू किया। हम अपने इलाक़े की सड़कों पर टहला करते थे। हमने नोटिस किया कि हर शाम को एक औरत सड़कों पर फिरते जानवरों को खाना खिलाती है। हम एक दिन उसके पास गए, उसने बताया कि कोविड शुरू होने के बाद ही से उसने ये काम शुरू किया है। उसकी मुलाज़िमत ख़त्म हो गई और उसने अपना सारा सरमाया उन जानवरों को खाना खिलाने में लगा दिया है। तक़रीबन 20 किलो खाना लेकर वो रोज़ाना शाम...

Nakir on Badgumani : बदगुमानी पर नकीर

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अस्सलामु अलैकुम दोस्तों! आज की ये पोस्ट आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है क्योंकि हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे गुनाह के सम्बंध में जिसे लो बहुत ही हल्का समझते हैं बल्कि गुनाह ही नहीं समझते, चुनांचे इसे आप ध्यानपूर्वक पढ़ें। हज़रत अबू हुरैरा रज़ि0 से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः ‘‘बदगुमानी से बचो क्यों कि बदगुमानी सबसे बड़ा झूठ है।’’ बदगुमानी एक तरह का झूठ है जो शख़्स इस बीमारी में फंसा हो उसका हाल ये होता है कि जिस किसी से इसका थोड़ा सा भी इख़्तिलाफ़ हो उसके हर काम में इसको बदनियती ही मालूम होती है, फ़िर केवल इसी वहम और बदगुमानी की वजह से वह उसकी तरफ बहुत सी फर्जी बातें जोड़ने लगता है, फिर उसकी क़ुदरती तौर पर ज़ाहिरी बर्ताव पर भी असर पड़ता है, और उस दूसरे इंसान की तरफ से भी इसका ग़लत बर्ताव होता है, इस तरह दिल फट जाते हैं और संबंध ख़राब हो जाते हैं। अल्लाह के रसूल सल्ल0 ने उपरोक्त हदीस में बदगुमानी को ‘‘अक्ज़बुल हदीस़’’ फरमाया है। बज़ाहिर इसका मतलब ये है कि किसी के खि़लाफ़ ज़ुबान से अगर झूठी बात कही जाए तो उसका सख़्त गुनाह होना हर मुसलमान जानता है, लेकिन किस...

Delhi Jama Masjid : लड़कियों के प्रवेश पर लगाई गई पाबंदी हटी

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  नई दिल्ली:   कल ही दिल्ली की शाही जामा मस्जिद में अकेली लड़की के प्रवेश पर पाबंदी का बोर्ड लगाया गया था परन्तु  दिल्ली की  जामा मस्जिद में लड़कियों के प्रवेश पर लगाई गई पाबंदी को एक दिन बाद ही हटा लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी से बात की और जामा मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले आदेश को तत्काल रद्द करने की अपील की। इमाम बुखारी ने आदेश को रद्द करने पर सहमति जताई है। इससे पहले मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी के कहा था, 'मस्जिद परिसर में कुछ घटनाएं सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया। उन्होंने कहा, ‘जामा मस्जिद इबादत की जगह है और इसके लिए लोगों का स्वागत है। लेकिन लड़कियां अकेले आ रही हैं और अपने दोस्तों का इंतजार कर रही हैं, यह जगह इस काम के लिए नहीं है। इस पर पाबंदी है।’ दिल्ली: जामा मस्जिद में अकेले या समूह में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का नोटिस मस्जिद के गेट नंबर 3 से हटा दिया गया है। #jamamasjid pic.twitter.com/W3LfJm17OO — NBT Hindi News (@NavbharatTimes) Novemb...

Delhi Jama Masjid : दिल्ली की जामा मस्जिद में अकेली लड़की का दाखि़ला मना है

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अभी हाल ही में दिल्ली की शाही जामा मस्जिद के गेट पर कमैटी द्वारा एक नोटिस बोर्ड लगाया गया है जिस पर लिखा है कि  " Jama Masjid mein ladki ya ladkiyon ka akele daakhla mana hai  (The entry of a girl, or girls is not permitted in Jama Masjid) परन्तु ट्यूटर पर एक महिला की वीडियो वायरल हो रही है जिसमें वो कुछ इस तरह का भाषण देते हुए नज़र आ रही है, नीचे देखिए, हालांकि ये फ़ैसला शाही इमाम सैयद अहमद बुख़ारी द्वारा बुराईयों को रोकने के लिए लिया गया है क्यों मस्जिद इबादतगाह है ना कि पर्यटन स्थल। मैडम @SwatiJaiHind :बहुत जल्दी मै हैं आप जरा तहकीक कर लेती ख़बर का,मस्जिद मै इबादत करना बंद नही हुआ है! हां उन लोगो के लिए मस्जिद जाना बंद हुआ है जो मस्जिद जा कर, अय्याशी करते हैं ! विडियोज,या फिर कुछ गलत काम अंजाम देते हैं, मस्जिद इबादत घर है अय्याशी का अड्डा नही pic.twitter.com/9k2kEq3eP1 — Abdul Hannan/ عبد الحنان (@001Hannan) November 24, 2022

President and Member of the Mosque : : मस्जिद का सदर एवं सदस्य बनने की शर्तें

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दोस्तों, यदि आप में से कोई किसी मस्जिद का ज़िम्मेदार मतलब मस्जिद का सदर या सदस्य बनना चाहता है तो उसे नीचे दिए गए बातों को ज़रूर ध्यान में रखना चाहिएः 1. 25 से 50 साल का दीनदार मुसलमान हो  2. नमाज, रौज़े का पाबंद हो 3. चेहरा सुन्नते रसूल से सजा हुआ हो 4. सूरह यासीन और दोनों खुत्बे याद हों गुलाम 5. मुकम्मल शरई लिबास हो 6. अल्फ़ाज़ की अदायगी के साथ अज़ान व तकबीर याद हो  7. वुजू और नमाज की सुन्नतें, फराइज़ व शराइत याद हों 8. इमाम साहब की गैर मौजूदगी में नमाज़ की इमामत कर सकता हो इन तमाम चीजों को अपने अंदर पाने के बाद ही मस्जिद की कमेटी का सदर एवं सदस्य बनने की कोशिश करें वरना अपने जाहिलाना दिमाग़ को एक आलिम के ऊपर मुसल्लत करने से गुरेज़ करें एक मस्जिद का इमाम मुहल्ले का इमाम होता है किसी के बाप का ग़ुलाम नहीं, इमाम को किसी भी तरह से तकलीफ देना खुद अपने हाथों जहन्नम ख़रीदने के बराबर होगा।

Khutbat E Juma in Etawah : उर्दू/हिन्दी इश्तिहार दिनांक 25 नवम्बर 2022 दिन जुमा

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शहर इटावा में ख़ुत्बात ए जुमा उर्दू इश्तिहार दिनांक 25 नवम्बर 2022 दिन जुमा  (29 रबीउल सानी 1444 हि0) शहर इटावा में ख़ुत्बात ए जुमा हिन्दी इश्तिहार दिनांक 25 नवम्बर 2022 दिन जुमा  (29 रबीउल सानी 1444 हि0)

Training Session : प्रशिक्षण सत्र : تربیتی اجتماع

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जमीअत अहले हदीस मुम्बई के ज़ेरे एहतिमाम तरबियती इज्तिमा का आयोजन किया जा रहा है जिसमें तमाम इस्लामिक लैक्चरार,अध्यापकगण और इमामों को दावत दी जा रही है। उर्दू इश्तिहार अरबी इश्तिहार

Shraddha Walkar Murder : श्रद्धा के दुर्भाग्यपूर्ण मामले से मिली सीख को काव्यात्मक तरीके से फैलाने की कोशिश

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  श्रद्धा के दुर्भाग्यपूर्ण मामले से मिली सीख को काव्यात्मक तरीके से फैलाने के लिए स्कूल प्रबंधन की ओर से यह एक शानदार पहल है। This is a brilliant initiative from the school management to spread across learnings from the unfortunate case of Shraddha in a poetic way. Must Watch and Share 🙏 #ShraddhaWalkar #AaftabPoonawala #AftabAminPoonawala pic.twitter.com/SpFyOTOBcr — Aak thuu (@dhakad_reporter) November 23, 2022

جب موسم بہار بھی موسم خزاں معلوم ہو۔

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 جب موسم بہار بھی موسم خزاں معلوم ہو۔ جب زندگی سے دل اُچاٹ ہو جائے۔ جب آئینہ اپنی شفافیت کے باوجود گرد آلود لگنے لگے۔  جب حیات واہیات لگنے لگے۔ جب ہر خوبصورت منظر آنکھوں میں چبھنے لگے۔ جب حزن وملال کے کالے بادل دل ناتواں پر چھا جائیں۔ جب آسمان سے برستا پانی بھی آپ کے آنسوں کو نہ چھپا سکے۔ جب آنکھ سے اشکوں کے بجائے لہو نکلے۔ جب ہر منظر دھندلا سا دکھائی دینے لگے۔ جب اپنے بھی پرائے لگنے لگیں۔ جب محبت و اعتماد جیسے الفاظ پرانی کہانیاں لگنے لگیں۔ جب حقیقت سے اعتبار اٹھ جائے۔ جب لوگوں کا اصلی چہرہ آپ کے سامنے آ جائے۔ جب وفا کا نام سن کر آپ کا دل جلتا ہو۔ جب لوگوں کی مسکراہٹ فریب لگنے لگے۔ جب سورج کی روشنی بھی آپ کے اندر کی تاریکی کو نہ مٹا سکے۔ جب چاند کی چاندنی بھی آپ کی توجہ کو مائل نہ کر سکے۔ جب فلک کے لا تعداد ستارے آپ کے دل کو زینت نہ بخش سکیں۔ جب شب کی تاریکی آپ کے قلب میں ہمیشہ کے لیے ڈیرا ڈال لے۔ جب بجلی کی کڑک آپ کو ڈرا نہ سکے۔ جب بادلوں کی فلک شگاف گرج آپ کے اندر ارتعاش نہ پیدا کر سکے۔ جب چین وسکون کے تمام مترادفات اور ہم معنی الفاظ آپ کی بے چینی میں اضافے کا سبب بننے لگیں...

FIFA World Cup 2022 : फीफा विश्व कप 2022 के दौरान कतर ने बीयर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया

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कतर सरकार ने आधिकारिक तौर पर आठ स्टेडियमों में बीयर की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसका उपयोग शुक्रवार, 18 नवंबर को 2022 विश्व कप मैचों के लिए स्थल के रूप में किया जाएगा। प्रतिबंध ने कई फुटबॉल प्रशंसकों को चौंका दिया क्योंकि यह उद्घाटन मैच से ठीक दो दिन पहले जारी किया गया था। स्टेडियम की परिधि के भीतर मादक पेय पदार्थों की बिक्री को प्रतिबंधित करने वाली नीति की फीफा द्वारा पुष्टि की गई है। इस नीति के परिणामस्वरूप, बीस्टेडियम की परिधि के भीतर मादक पेय पदार्थों की बिक्री को प्रतिबंधित करने वाली नीति की फीफा द्वारा पुष्टि की गई है। इस नीति के परिणामस्वरूप, बीयर जैसे मादक पेय केवल शाम 7 बजे के बाद प्रशंसक क्षेत्रों में और आधिकारिक तौर पर लाइसेंस प्राप्त मनोरंजन स्थलों में उपलब्ध हैं।यर जैसे मादक पेय केवल शाम 7 बजे के बाद प्रशंसक क्षेत्रों में और आधिकारिक तौर पर लाइसेंस प्राप्त मनोरंजन स्थलों में उपलब्ध हैं। कतर ने इससे पहले फीफा की स्टेडियमों में शराब बेचने की शर्तों पर सहमति जताई थी जब उसने विश्व कप की मेजबानी कीकतर ने इससे पहले फीफा की स्टेडियमों में शराब बेचने की शर्तों पर सहमति जता...

Religious Knowledge : धार्मिक ज्ञान का महत्व और महानता

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अबू हुरैरा (रजि़०) ने कहा; अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: "जो कोई भी ज्ञान की तलाश में मार्ग का अनुसरण करता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का मार्ग आसान कर देगा।" इस हदीस में उन लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है जो ज्ञान की तलाश में लगे हुए हैं, भले ही वे ज्ञान कैसे प्राप्त करें। लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि धर्म के सुधार में, ज्ञान को आम तौर पर ईश्वर के ज्ञान और ईश्वर के ज्ञान के स्रोत के रूप में संदर्भित किया जाता है। सर्वशक्तिमान अल्लाह कहते हैं: अल्लाह से उसके बन्दों में वही लोग डरते हैं जो जानने वाले होते हैं। जैसा कि सूरह इकरा में कहा है: "इकरा बिस्मी रब्बिका" (अपने रब के नाम से पढ़)। इससे यह बहुत स्पष्ट हो जाता है कि ज्ञान को ईश्वरीय नाम से जोड़ा जाना चाहिए, और यह ईश्वरीय ज्ञान की काठी बन जाना चाहिए, अन्यथा वह ज्ञान वास्तव में ज्ञान कहलाने के योग्य नहीं है जो रब के नाम से रहित है, वह हजार अज्ञानता, पथभ्रष्ट और पथभ्रष्ट का स्रोत बन जाता है।  निस्संदेह, दिव्य ज्ञान का स्रोत बुद्धि के सर्वोत्तम कार्यों में से एक है, और कई हदीसों में इसके प्राप...