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जुलाई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Qurbani : क़ुर्बानी का मसनून तरीक़ा व दुआ एवं अय्यामे तशरीक़

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Qurbani : बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम : अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रका तुहू!  मेरे अज़ीज़ साथियों, इस पोस्ट में हम आपकी ख़िदमत में पेश कर रहे हैं “क़ुर्बानी (Qurbani) का मसनून तरीक़ा व दुआ एवं महीना ज़िल-हिज्जा, क़ुर्बानी और आमाल की फज़ीलत” पर आधारित Pumplate 02. इन शा अल्लाह! इसमें आप लोग क़ुर्बानी (Qurbani) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी विस्तार से जानेंगे इसके साथ साथ महीना ज़ुल हिज्जा की फ़ज़ीलत, क़ुर्बीनी (Qurbani) और इस माह में किये जाने वाले आमाल की भी जानकारी आप लोगों को दी जा रही है। चुनांचे आप हज़रात से गुज़ारिश है कि क़ुर्बानी (Qurbani) के इस Pumplate को दूसरों तक भी पहुंचाने का ख़ैर काम ज़रूर करिए। ताकि और लोग भी कुर्बानी (Qurbani) का सुन्नत तरीक़ा माहे ज़िल हिज्जा और इसमें किये जाने वाले आमाल की फ़जीलत को जान जाएं, अल्लाह तआला हम सभी को अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाऐ, आमीन! महीना ज़िल-हिज्जा, क़ुर्बानी और आमाल की फज़ीलत ‘‘पस तू अपने रब के लिए नमाज़ पढ़ और क़ुर्बानी कर’’ (सूरह कौसर: 2)     ज़िल-हिज्जा इस्लामी साल का आखि़री महीना है क़ुरआन और सहीह अहादीस में इसक...

Dr Zakir Naik : हराम गोश्त के बारे में दिलस्प सवाल : Christian Woman

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Heartfelt Questions about Haram Meat Dr Zakir Naik : मेरे अज़ीज़ साथियों!  अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू!  आप लोग एक ऐसी हस्ती से बख़ूबी वाक़िफ हैं जो आज के इस दौर में मशहूर इस्लामिक स्काॅलर में से एक हैं जिनके ज़रिए दुनियाभर में बहुत सारे दूसरे धर्म के लोग इस्लाम क़ुबूल कर चुके हैं। जब उनसे इस्लाम या और धर्मों के बारे में कुछ भी सवाल किया जाता है वे उसे बहुत ही अच्छे तरीक़े से क़ुरआन व सहीह अहादीस की रोशनी में और उन्हीं के धर्मों की किताबों के हवालों से बिल्कुल सटीक जवाब देतें हैं और साथ ही आज के मौजूदा दौर में साइंस के ज़रिए भी वे उनकों समझाते हैं। हालांकि आप उनको बहुत ही अच्छी तरीकें से जानते है। हर कोई उनसे वाक़िफ है, अब तो आप समझ ही चुके होंगे कि मेरी मुराद किन से है, चलिए अब मैं आपको उनका नाम बता ही देता हूँ, वे डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक (Dr Zakir Naik) हैं। दरअसल एक इज्तिमा में डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक (Dr Zakir Naik) से एक ईसाई ख़ातून जिसका नाम उर्निला था, उसने इंतिहाई दिलचस्प सवाल बड़े अनोखे अंदाज़ में किया उस ख़ातून ने कहा कि मैं सूअर का गोश्त खाती ...

Days of Arafah : अगले पिछले दो साल के गुनाह माफ

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अरफा के दिन का रोज़ा : अरफा के दिन के रोज़े की फज़ीलत और इसका सवाब अगले पिछले दो साल के गुनाह माफ : 9 Zulhijja Ka Roza ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ، ‏‏‏‏‏‏أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، ‏‏‏‏‏‏حَدَّثَنَا غَيْلَانُ بْنُ جَرِيرٍ، ‏‏‏‏‏‏عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَعْبَدٍ الزِّمَّانِيِّ، ‏‏‏‏‏‏عَنْ أَبِي قَتَادَةَ، ‏‏‏‏‏‏قَالَ:‏‏‏‏ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:‏‏‏‏ صِيَامُ يَوْمِ عَرَفَةَ إِنِّي أَحْتَسِبُ عَلَى اللَّهِ أَنْ يُكَفِّرَ السَّنَةَ الَّتِي قَبْلَهُ، ‏‏‏‏‏‏وَالَّتِي بَعْدَهُابوقتادہ رضی اللہ عنہ کہتے ہیں کہ رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا: میں سمجھتا ہوں کہ عرفہ ۱؎ کے دن روزہ رکھنے کا ثواب اللہ تعالیٰ یہ دے گا کہ اگلے پچھلے ایک سال کے گناہ بخش دے گا ۲؎۔ In the name of Allah, the Most Gracious, the Most Merciful It was narrated from Abu Qatadah hat the Messenger of Allah Said: “Fasting on the Day of ‘Arafah’, I hope from Allah, expiates for the sins of the year before and the year after.” (S...

Wasiyat Nama : How to write a Will for your (Auwlaad) Children : Will

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Bismllahirrahmanirrahim : Will – Wasiyat Nama : Dear Readers! It is an Islamic Will (Islami Wasiyat Nama) format, Insha Allah, It will be a core beneficial format of Will (Wasiyat Nama) for those who want to write it for their children & it’s my request to you all gentlemen, to take note of it (Will – Wasiyat Nama) , for your beloved ones/children or to who so ever concern, prior to Rest in Peace (RIP) to strengthen the Islamic teachings. I welcome your valuable advice & corrections; sound good and fit to add to this Will (Wasiyat Nama) format to rectify any mistakes and make Will (Wasiyta Nama) more accurate. Also, please don’t forget to LIKE & SHARE this Will (Wasiyat Nama) to spread the benefit to all others as well. (Will Wasiyat Nama). I request you to subscribe our blog & channel to keep you informed with all new updates.  So let’s go ahead, and start. How to write a Will (Wasiyat Nama) for your children بِسمِ اللہ ِالرَّحمٰنِ الرَّحِیم اَلحَمدُ للہِ ...

Special Tips : क़ुर्बानी के बारे में बहुत ख़ास नसीहतें : About Qurbani

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Special Tips : मोहतरम हज़रात, अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाह व ब रकातुहू! इस मुख़्तसर व जामे मज़मून में क़ुर्बानी के चन्द़ अहम अहकाम व मसाइल दलीलों से साथ आपकी खि़दमत में पेश कर रहा हूँ। क़ुर्बानी से पहले इन बातों Special Tips का जानना आपके लिए और सभी मुसलमानों के लिए निहायत ही ज़रूरी है। इसे Special Tips को आप ध्यानपूर्वक पढ़ें और इस Special Tips पोस्ट को शेयर करके दूसरों को भी बताऐं ताकि उनको भी क़ुर्बानी के अहकाम व मसाइल की सही जानकारी हो सके। अल्लाह तआला हम सभी के इस अमल को सद्क़ा-ए-जारिया बनाये। आमीन! अब पेश हैै – Special Tips : क़ुर्बानी के बारे में बहुत ख़ास नसीहतें : About Qurbani – Very special tips about Qurbani ( बिस्मिल्लिाहिर्रहमानिर्रहीम ) क़ुर्बानी के बारे में बहुत ख़ास नसीहतें इनका जानना आपके लिए निहायत ज़रूरी है : क़ुर्बानी के अहकाम व मसाइल बा दलील (लेख: मुहद्दिुल अस्र हाफिज़ ज़ुबैर अली ज़ई रहमतुल्लाह) क़ुर्बानी सुन्नते मुअक्कदा है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलइहि वसल्लम ने फरमाया : आज ईदुल अज़्हा के दिन हम सबसे पहले नमाज़ पढ़ेंगे, फिर वापस आकर क़ुर्बान...

Sacrifice Rules and Issues: क़ुर्बानी के बाज़ अहकाम व मसाइल : Zubair Ali Zai

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Sacrifice Rules & Issues : बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम! ईदुल अज़्हा के मौक़े पर जो क़ुर्बानी की जाती है, उसके बाज़ अहकाम व मसाइल खि़दमते पेश हैं। الحمد رب العالمین والصلٰوۃ والسلام علٰی رسولہ الأمین، أما بعد नम्बर 01 सय्यदा उम्मे सलमा रज़िअल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलइहि वसल्लम ने फरमाया ((إذا رأیتم ھلال ذی الحجۃ و أراد أحدکم أن یضحّی فلیمسک عن شعرہ و أظفارہ)) जब तुम ज़ुल-हिज्जा का चाँद देखो और तुम में से कोई शख़्स क़ुर्बानी करने का इरादा करे तो उसे बाल और नाख़ून तराशने से रूक जाना चाहिए। (सहीह मुस्लिम: 1977 तरक़ीम दारूस्सलाम: 5119) इस हदीस में ‘‘इरादा करे’’ से ज़ाहिर है कि क़ुर्बानी करना वाजिब नहीं बल्कि सुन्न्त है। देखिए अल-महल्ली लिइब्ने हज्म 7/355 मसला: 973) इस हदीस से ये भी साबित हुआ कि क़ुर्बानी का इरादा रखने वाले के लिए नाख़ून तराशना और बाल मूंढना/मुंढवाना, तराशना जायज़ नहीं। सय्यदना अबू सरीहा रज़िअल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि सय्यदना अबू बकर सिद्दीक़ और सय्यदना उमर रज़िअल्लाहु अन्हुमा दोनों मेरे पड़ौसी थे और दोनों क़ुर्बानी नहीं करते थे। (मालिफतु...

Current Situation : मौजूदा हालात पर ज़रा ग़ौर फरमाऐं : Stars

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सितारे फ़लक़ के बुझे जा रहे हैं हमारे अक़ाबिर उठे जा रहे हैं कुछ इस तरह टूटा है तस्बीह का धागा  के सारे ही मोती गिरे जा रहे हैं मदारिस हमारे हुए बंद ऐसे के ज़ी इल्म रूठे हुए जा रहे हैं ये नबियों के वारिस, ज़मीं का ये सब्ज़ा ये धरती को वीरां किये जा रहे हैं वो जिनसे थीं रौशन फ़िज़ाएं वतन की दिये रफ्ता रफ्ता बुझे जा रहे हैं उफुक़ पार क्या इल्मी महफ़िल है कोई? सभी अहले दानिश चले जा रहे हैं सितारे फ़लक़ के बुझे जा रहे हैं हमारे अक़ाबिर उठे जा रहे हैं

The Virtue of Zul Hajj : ज़ुल-हिज्जा के दस दिनों की फज़ीलत : Ten Days

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The Virtue of Zul Hajj : इस लेख में ज़ुल-हिज्जा के दस दिनों की फज़ीलत (The virtue of the ten days of the Zul Hijjah) के सम्बंध में जानकारी दी गई है। (बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम) (3)  وَالۡفَجۡرِ (1)   وَلَیَالٍ عَشۡرٍ (2)  وَّ الشَّفۡعِ وَ الۡوَتۡرِ वल फज्र। वलायालिन अश्र। वश शफ्यी वल वत्र (सूरहः फज्र: 1-2-3) ‘‘क़सम है फज्र और दस रातों की और जुफ्त और ताक़ की।’’     सूरहः फज्र की इन इब्तिदाई तीन आयात की तफसीर मुसनद अहमद में यूँ मज़कूर है, चुनांचेः हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़िअल्लाहु अन्हु से रिवायत है, फरमाते हैंः      “दस” से मुराद ज़ुल-हिज्जा के पहले दस दिनों की रातें हैं, और “ताक़” से मुराद यौमे अरफा है, और “जुफ्त” से मुराद नहर और क़ुर्बानी का दिन है, क्योंकि ये अमल दसवां दिन अंजाम पाता है।’’ (मुसनद अहमद 3/327, मुस्तदरक लिल-हाकिम 4/320, तफसीर इब्ने जरीर 15/169) और अल्लाह तआला ने फरमायाः  وَ اذۡکُرُوا اللّٰہَ فِیۡۤ  اَیَّامٍ  مَّعۡدُوۡدٰتٍ वज़ कुरूल्लाहः फी अय्यामिन मअदूदाति...

Etawah Unlock : 31 जुलाई तक खुलेगा इटावा शहर का बाज़ार दोनों साइड साथ : Etawah Lockdown

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इटावा लाॅकडाउन स्पेशल न्यूज़ (Etawah Lockdown Special News) : अब 31 जुलाई तक खुलेगा इटावा शहर का बाज़ार दोनों साइड एक साथ – ज़िलाधिकारी इटावा प्रायोगिक तौर पर 21 व 22 जुलाई को खोला गया इटावा का सम्पूर्ण बाज़ार। व्यापार मंडल, दुकानदारों एवं ग्राहकों ने सोशल डिस्टेनसिंग व मास्क लगाकर किया नियमों का पालन। अब 31 जुलाई तक दोनो साइड की दुकानें खुलेंगी एक साथ। सोशल डिस्टेनसिंग व मास्क के नियमों का पालन न करने पर की जायेगी कड़ी कार्यवाही। इटावाः उपजिलाधिकारी सदर सिद्धार्थ ने बताया कि दिनांक 21 व 22 जुलाई को प्रायोगिक तौर पर सम्पूर्ण बाजार एक साथ खोले जाने के उपरांत समीक्षा में पाया गया कि बाजार में दुकानदारों व जनसामान्य द्वारा सामान्य रूप से सोशल डिस्टेनसिंग व मास्क लगाने के नियमों का पालन किया जा रहा है। अतः जिलाधिकारी जे बी सिंह के निर्देश पर 31 जुलाई(शुक्रवार) तक बाजार को एक साथ दोनों ओर सुबह 9 बजे से रात्रि 8 बजे तक खोले जाने का निर्णय लिया गया। उक्त अवधि में व्यापार मंडल द्वारा सोशल डिस्टेनसिंग के समस्त मानकों को पूर्ण करते हुए बाजार की व्यवस्था बनाने में जिला प्रशासन का सहयोग किया जाएगा। ...

Sacrifice Rules : दो दांते से कमतर की क़ुर्बानी के सम्बंध में : Part 4

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Sacrifice Rules : बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम! दो दांते से कम तर की क़ुर्बानी जायज़ नहीं है, सम्बंध में सम्पूर्ण जानकारी के लिए इस लेख को पूरा पढ़ेें. सवाल: क्या दो दांते जानवर से कम उम्र की क़ुर्बानी करना जायज़ नहीं, जबकि नबी सल्लल्लाहु अलइहि वसल्लम ने एक सहाबी को बकरी का बच्चा ज़िबह करने की इजाज़त दी थी? जवाब: क़ुर्बानी के जानवर के लिए जो शरायत शरीअते मुतहृहरा ने बयान की हैं उनमें से एक शर्त ये है कि क़ुर्बानी वाला जानवर दो दांता हो और अगर ये मिलना मुश्किल हो या उसे ख़रीदने की हिम्मत न हो तो भेड़ का खैरा क़ुर्बान करना जायज़ व दुरूस्त है। जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़िअल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलइहि वसल्लम ने फरमायाः لَا تَذْبَحُوا إِلَّا مُسِنَّةً، ‏‏‏‏‏‏إِلَّا أَنْ يَعْسُرَ عَلَيْكُمْ، ‏‏‏‏‏‏فَتَذْبَحُوا جَذَعَةً مِنَ الضَّأْنِ ‘‘ला तज़्बहू इल्ला मुसिन्नतन इल्ला अइंयअसुरः अलइकुम फ-तज़्बहू जज़्अतम मिनज़्ज़अनि’’ तुम (मसिन्ना) दो दांते के सिवा ज़िबह न करो लेकिन अगर तुम्हारे ऊपर तंगी हो तो (जज़आ) भेड़ का खैरा ज़िबह कर लो। (मुस्...

Sacrifice Rules : क़ुर्बानी के सिर्फ तीन दिन क़ुरआन व हदीस़ से साबित : Part 3

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Sacrifice Rules : (बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम) : क़ुर्बानी के सिर्फ तीन दिन है , क्या चौथे दिन क़ुर्बानी करना क़ुरआन व हदीस से साबित है? सवाल: क्या चौथे दिन क़ुर्बानी करना क़ुरआन व हदीस से साबित है? मैंने कुछ उलेमा से सुना है कि चौथे दिन क़ुर्बानी करने वाली जो अहादीस हैं वो ज़ईफ है। और अब्दुल्ला बिन उमर रज़िअल्लाहु अन्हु से सहीह सनद के साथ साबित है कि वो फरमाते थे कि क़ुर्बानी तीन दिन है। इस सिलसिले में हफ्ता रोज़ा अहले हदीस में फज़ीलतुश शैख़ अब्दुल सत्तार हम्माद हफिज़हुल्लाह ने दलीलों से साबित किया है कि क़ुर्बानी चार दिन है उनकी दलीलें इस तरह हैं- क़ुर्बानी ईद के बाद तीन दिन तक की जा सकती है। ईद 10वीं ज़ुल हिज्जा को होती है, इसके बाद तीन दिनों को अय्यामे तश्रीक़ कहते हैं। अय्यामे तश्रीक़ को ज़िबह के दिन क़रार दिया गया है चुनांचे हज़रत जुबैर बिन मुत्इम रज़िअल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहु अलइहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: तमाम अय्यामे तश्रीक़ ज़िबह के दिन हैं (मुसनद अहमद स0 82 जि0 4)      अगरचे इस रिवायत के मुतालिक़ कहा जाता है कि मुन्क़तेअ है लकिन इम...