Wandering and Morality : आवारगी और अख़्लाक़ : Time never come back
Wandering and Morality : मेरे प्रिय पाठकगण, अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रका तुहू! इस पोस्ट में हम अपने प्यारे और भोले भाले नौजवानों को आवारगी और अख़लाक़ (Wandering and Morality) के विषय पर निम्नलिखित ऐसी बातों और कामों से अवगत कराना चाहते हैं जिनका जानना आपके लिए अत्यन्त आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है। और वो ये हैं – Now let’s start : Wandering and Morality आवारगी (Wandering) आजकल बेहयाई (निर्लज्जता) ज़ोरों पर है। मां-बाप की शर्म और अल्लाह का ख़ौफ़ दोनों ही नहीं हैं। बस ऐश करने की धुन सवार है। बनाव-सिंगार करके लड़कियां बाजा़रों में आज़ादी से घूमती फिरती हैं और लड़के इनका ताक़्कु़ब (पीछा) करते हैं। दोनों एक-दूसरे को बुरी नज़रों से देखते हैं और दिल कहता है कि आपस में दोस्ती कर लो और एक दूसरे के जिस्म से लज़्ज़त हासिल करो, मेरे मासूम दोस्तों, फिर आप बुरे लोगों के झांसे में आकर यह समझने लगते हैं कि फ़्लां बहुत ख़ूबसूरत है। इसलिए सारा-सारा दिन उसके ताक़्कु़ब में आवारागर्दी करते हैं और रातों को भी उसके ख़्याल ही में सोते और ख़्वाब देखते हैं, जिसका नतीजा यह होता है कि रफ़्ता-रफ़्ता आपकी सेहत...