"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम" सहीह मुस्लिम की हदीस नं० 6542 में हज़रत अबू हुरैरा (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया: "अल्लाह आपके शरीर और चेहरों को नहीं देखता, बल्कि वह आपके दिलों को देखता है।" इस हदीस़ में यह बात कही गई है कि कर्मों की स्वीकृति ह्रदय की स्थिति पर आधारित है। कर्म चाहे छोटा हो या तुच्छ, पूजा से संबंधित हो या आदत और आवश्यकता से, अगर यह इख़लास और अल्लाह की रजा़मंदी के इरादे से किया जाता है, तो अल्लाह उसके कर्मों को स्वीकार करेडा, अन्यथा, वह कर्म निर्जीव है, और अल्लाह के यहां उसकी कोई हैसियत नहीं है। अल्लाह को खु़श करने की इसी मंशा का नाम इख़लास है। इख़लास एक ऐसी तेज़ तलवार है जो ईश्वर की प्रसन्नता के इस उदात्त उद्देश्य को छोड़कर हर उद्देश्य को नष्ट कर देती है, फिर संतुष्टि की कोई सांसारिक इच्छा नहीं होती है और न तो देश, धन और साम्राज्य की इच्छा, न गर्व और सम्मान की इच्छा, न सत्ता और अधिकार की इच्छा, न विलासिता और आराम की इच्छा, न ही क्रोध और प्रतिशोध की इच्छा। इसलिए, प्रत्येक कार्य जो एक व...