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Showing posts from September, 2026

कुरआन हकीम के 100 संक्षिप्त संदेश | जीवन बदलने वाली कुरआनी शिक्षाएँ

  कुरआन मजीद केवल तिलावत करने की किताब नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए हिदायत, रहमत, इंसाफ, अच्छे अख़लाक और कामयाब ज़िंदगी का मार्गदर्शन है। कुरआन हमें अल्लाह तआला की इबादत के साथ-साथ माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने, सच्चाई अपनाने, इंसाफ करने, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने, यतीमों के अधिकारों की रक्षा करने, बुराई से बचने और लोगों के साथ अच्छे अख़लाक से पेश आने की शिक्षा देता है। नीचे कुरआन मजीद की विभिन्न शिक्षाओं और आयतों के संक्षिप्त भावार्थ के रूप में 100 संदेश प्रस्तुत किए जा रहे हैं। कुरआन हकीम के 100 संक्षिप्त संदेश 1. बातचीत के दौरान बदतमीज़ी न किया करो। 2. अपने गुस्से पर काबू रखो। 3. दूसरों के साथ भलाई करो। 4. तकब्बुर और घमंड न करो। 5. दूसरों की गलतियों को माफ कर दिया करो। 6. लोगों से नरमी और अच्छे अंदाज़ में बात करो। 7. अपनी आवाज़ नीची रखो। 8. किसी का मज़ाक न उड़ाओ। 9. माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो। 10. माता-पिता को 'उफ़' तक न कहो और उनसे सम्मान से बात करो। 11. किसी के घर या निजी स्थान में बिना अनुमति प्रवेश न करो। 12. लेन-देन और कर्ज़ के माम...

उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा: ईमान, सब्र और एक महान माँ की कहानी

उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा इस्लामी इतिहास की उन महान महिलाओं में से हैं, जिनकी ज़िंदगी ईमान, हिकमत, सब्र और बेहतरीन तर्बियत की मिसाल है। उनकी ज़िंदगी में हमें यह सीख मिलती है कि एक महिला अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहते हुए अपने परिवार और आने वाली नस्लों के लिए कितना बड़ा किरदार अदा कर सकती है। उनकी ज़िंदगी का एक मशहूर वाक़िया उनके निकाह से जुड़ा हुआ है। जब अबू तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु ने उनके लिए निकाह का पैग़ाम भेजा, उस समय वह मुसलमान नहीं थे। रिश्ता अच्छा था और अबू तल्हा एक बाक़रदार शख़्स थे, लेकिन उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा के लिए सबसे अहम सवाल था: क्या हम दोनों का रास्ता एक है? उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा का मेहर क्या था? उम्मे सलीम रज़ियल्लाहु अन्हा ने अबू तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु से कहा: “मैं मुसलमान हूँ और तुम मुसलमान नहीं हो, इसलिए मेरे लिए तुमसे निकाह जायज़ नहीं। अगर तुम इस्लाम क़ुबूल कर लो तो वही मेरा मेहर होगा।” उन्होंने न सोना माँगा और न चाँदी। उनके लिए दुनिया की दौलत से बढ़कर ईमान था। चुनाँचे अबू तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु इस्लाम ले आए और यही उनका ...