Heartfelt Questions about Haram Meat
Dr Zakir Naik : मेरे अज़ीज़ साथियों! अस्सलामु अलइकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहू! आप लोग एक ऐसी हस्ती से बख़ूबी वाक़िफ हैं जो आज के इस दौर में मशहूर इस्लामिक स्काॅलर में से एक हैं जिनके ज़रिए दुनियाभर में बहुत सारे दूसरे धर्म के लोग इस्लाम क़ुबूल कर चुके हैं। जब उनसे इस्लाम या और धर्मों के बारे में कुछ भी सवाल किया जाता है वे उसे बहुत ही अच्छे तरीक़े से क़ुरआन व सहीह अहादीस की रोशनी में और उन्हीं के धर्मों की किताबों के हवालों से बिल्कुल सटीक जवाब देतें हैं और साथ ही आज के मौजूदा दौर में साइंस के ज़रिए भी वे उनकों समझाते हैं। हालांकि आप उनको बहुत ही अच्छी तरीकें से जानते है। हर कोई उनसे वाक़िफ है, अब तो आप समझ ही चुके होंगे कि मेरी मुराद किन से है, चलिए अब मैं आपको उनका नाम बता ही देता हूँ, वे डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक (Dr Zakir Naik) हैं। दरअसल एक इज्तिमा में डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक (Dr Zakir Naik) से एक ईसाई ख़ातून जिसका नाम उर्निला था, उसने इंतिहाई दिलचस्प सवाल बड़े अनोखे अंदाज़ में किया उस ख़ातून ने कहा कि मैं सूअर का गोश्त खाती हूँ और मुझे नहीं मालूम कि सूअर के गोश्त को इस्लाम में क्यों हराम किया गया है, इस्लाम कहता है कि सूअर का गोश्त हराम है और ईसाइयत कहती है कि सूअर का गोश्त हराम नहीं है, और मैं तो सूअर का गोश्त खाती हूँ, मुझे बहुत मज़ा आता है आप बताऐं कि इस्लाम में ऐसा क्यों है?
अज़ीज़ साथियों, आपसे इल्तिमास है कि इस लेख को पूरा ज़रूर पढ़ें, ताकि आप जान सकें कि सूअर खाने के क्या-क्या नुक़सानात हैं।
दोस्तों, लेख में आखि़र में जो डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने सूअर खाने से मुतालिक़ अहम सांइटिफिक रीज़न बताये हैं वो जानकर आप हैरान रह जायेंगे।
चलिए, अब आगे बढ़ते हैं और पढ़ते हैं पूरा लेख-
डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने जवाब में कहा कि मेरी बहन सबसे पहले मैं आपको बताऊँगा कि लफ्ज़ ‘‘हराम’’ का मतलब क्या है? इस्लाम में लफ्ज़ “हराम” का मतलब है ‘‘मना किया गया’’, यानी वो काम जिससे रोका गया हो। यानी कि वो खाने-पीने की चीज़ें जिन्हें हराम किया गया है, ये वो चीज़ें हैं जिन्हें कोई भी मुसलमान नहीं खा सकता।
डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा अब मैं आपको बताता हूँ कि क़ुरआन-ए-पाक और बाइबल सूअर के हराम या न हराम होने से मुतालिक़ क्या कहते हैं। यक़ीनन आपको समझ आ जाएगा। डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा कि किसी भी जानकारी का ज़रिया उनके लिए किताबें होती हैं, मुसलमानों के लिए क़ुरआन-ए-पाक है, ईसाइयों के लिए बाइबल है।
पहले बात कर लेते हैं मुसलमानों के लिए क़ुरआन-ए-पाक में क्या कहा गया है सूअर के गोश्त के हवाले से। डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा जब हम क़ुरआन-ए-पाक का मुताला करें तो क़ुरआन-ए-पाक में चार ऐसे मक़ाम हैं जहाँ ये कहा गया है कि सूअर का गोश्त खाना हराम है। वो चार मक़ाम कौन से हैं, डा0 ज़ाकिर नायक ने वो भी गिनवा दिया।
1- सूरह बक़रा 2, आयत नं0 : 173
2- सूरह मायदा 5, आयत नं0 : 3
3- सूरह अनआम 6, आयत नं0 : 145
4- सूरह नहल 16, आयत नं0 : 115
अल्लाह तआला ने इन आयात के ज़रिए सूअर का गोश्त हराम क़रार दिया है।
अज़ीज़ साथियों, अगले ही लम्हे वो हाॅल तालियों से गूँज उठा कि जब डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने उस ईसाई ख़ातून के सामने ये कहा कि सिर्फ क़ुरआन ही नहीं बाइबल में भी तीन मक़ामात ऐसे हैं कि जहाँ पर कहा गया है कि सूअर का गोश्त खाना हराम है। और सवाल करने वाली वो औरत कि जिसने कहा था कि वो सूअर का गोश्त खाना पसन्द करती है मुस्कराने लगी। डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा कि बुक आफ लेविटिक्स (Book of Leviticus) चैपटर नं0 11, आयत 7-8 में कहा गया है कि सूअर को हाथ न लगाओ ये तुम्हारे लिए हराम है ये नापाक है।
अज़ीज़ साथियों, ये हिस्सा डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने बाइबल से पढ़कर समझाया था। डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा कि इसी तरह का मैसेज़ ईसाइयों की किताब बुक आफ डियुट्रोनाॅमी (Book of Deuteronomy) चैपटर नं0 14, आयत नं0 8 में भी दिया गया है, तर्जुमाः सूअर का गोश्त तुम्हारे लिए हराम है और ये नापाक है इसी तरह से ईसाइयों की किताब बुक आफ अजाया (Book Of Ajaya) चैपटर नं0 65 आयत नं0 2-5 में भी कहा गया है कि तुम सूअर का गोश्त नहीं खाओगे। डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा कि मैं इस मौक़े पर उन लोगों के लिए भी वाज़ेह कर देता हूँ जो न सिर्फ क़ुरआन-ए-पाक को झुठलाते हैं या बाइबल को भी झुठलाते हैं उन्हें मैं मौजूदा हालात और इस दौर के हिसाब से साइंस के मुताबिक़ बताता हूँ कि सूअर का गोश्त क्यों नहीं खाना चाहिए।
डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा कि मैं एक मेडिकल डाक्टर हूँ और आपको बताना चाहता हूँ कि अगर आप सूअर का गोश्त खाते हैं तो भी कम से कम सत्तर से ज़्यादा बीमारियाँ आपको लग सकती हैं और इनमें से सबसे ज़्यादा ख़तरनाक बीमारी टैपवाॅम्र्स (Tapeworms) है जोकि “आँत” में हो जाती है और ये बहुत ख़तरनाक और सख़्त तकलीफ देह है और लम्बे अर्से तक चलती है, ये बीमारी सूअर का गोश्त खाने से होती है। डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने इस मौक़े पर इंतिहाई हैरानकुन बात ये बतायी कि जो लोग सूअर का गोश्त खाते हैं, भले उसको अच्छे तरीक़े से पका भी लिया जाऐ, तो भी उसके गोश्त में कुछ ऐसे सेल्स होते हैं जो पकाने से भी ज़िन्दा रहते हैं और जब हम खा लेते हैं तो हमारी आँतों के ज़रिए हमारे ख़ून में दाखि़ल हो जाता है और सूअर का गोश्त खाने वाले आदमी के जिस्म के हर हिस्से तक पहुँचता है, आँखों में पहुँच कर आँखों को अंधा कर देता है, कानों तक पहुँच कर इंसान की समाअत उससे छीन लेते है, और सबसे बड़ा मसला तो ये है कि जब तक सूअर का गोश्त खाने वाले आदमी को ये मालूम होता है कि उसे ये बीमारीयाँ हो चुकी हैं तब तक बात बहुत आगे निकल चुकी होती है।
इसके अलावा साइंस ये बताती है कि वो लोग जो सूअर का गोश्त खाते हैं उनके जिस्म पर चर्बी ज़्यादा चढ़ जाती है। डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा कि आज की साइंस ये भी बताती है कि अगर आप सूअर का गोश्त बाक़ायदगी से खाऐं तो आपको ज़ेहनी मरीज़ बना सकती है क्यों कि आप में डिप्रेशन यानी कि हर वक़्त टेंशन लेना और परेशानी में इज़ाफा हो जाता है।
अज़ीज़ साथियों देखिए, इस्लाम ने किस तरह से हमें मुख़्तलिफ हराम जानवरों के गोश्त खाने से बचाया है ताकि हमारी सेहत भी अच्छी रहे और हमारी ज़िन्दगी भी अच्छी रहे, लेकिन सोचिए कि कितने बदक़िस्मत हैं वो लोग जो दीन-ए-इस्लाम की नेमत से महरूम हैं और सूअर जैसी हराम चीज़ का गोश्त खाते हैं।
डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा कि इस वक़्त अमरीका में सबसे ज़्यादा लोग हैं जो ज़ेहनी मरीज़ बन रहे हैं और वो डिप्रेशन का शिकार रहते हैं और उनमें से अक्सरीयत उन लोगों की है जोकि सूअर का गोश्त खाते हैं। और डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने ये भी कहा कि आज की साइंस बताती है कि दुनिया में सबसे गलीज़ मक़ाम जो होता है वहीं सूअर आपको मिलेगा। साइंस साबित कर चुकी है कि सुअर का गोश्त और सूअर बतौर जानवर सबसे ज़्यादा गलीज़ और गंदा जानवर है।
और अज़ीज़ साथियों, सबसे अहम बात जो डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने जो कही थी वो ये थी कि साइंस साबित कर चुकी है कि सबसे बेशर्म जानवर भी सूअर ही है। क्यों कि ये वो जानवर है जो अपने बच्चों की माँ को अपने दोस्तों के हाथों अपनी आँखों के सामने जिन्सी अमल का निशाना बनते देखकर ख़ुश होता है यही वजह है कि इसे सबसे बेशर्म जानवर कहा गया है। और डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने कहा कि आप मग़रिबी मुमालिक में देख लीजिए कि वो लोग जो सूअर का गोश्त खाते हैं उनके यहाँ डाँस पार्टीज़ होती हैं और रात में आखि़र में ये फैसला होता है कि हम अब आपस में अपनी-अपनी बीवियाँ तब्दील करेंगे, यानी कि मेरी बीवी तुम्हारे साथ और तुम्हारी बीवी मेरे साथ चली जायेगी, और इस तरह से ये लोग ज़िन्दगी जीते हैं। अब आप देख लीजिए, सूअर का गोश्त खाकर उनकी ज़िन्दगीयां भी सूअर जैसी हो चुकी हैं। जब कि अल-हम्दु लिल्लाह! इस्लाम ने हमें इन सबसे बचा लिया है।
डाॅक्टर ज़ाकिर नाइक ने अपनी बात ख़त्म करते हुए कहा कि मैं मुख़्तसरन ये कहूँगा कि साइंस से ये साबित हो चुका है, वो लोग जो सूअर का गेाश्त खाते हैं वो सूअर जैसे ही बन जाते हैं, और वैसे ही ज़िन्दगी गुज़ारते हैं।
मेरे अज़ीज़ साथियों, इस लेख में सूअर का गोश्त क्यों हराम है, इसके बारे में बहुत ही अहम बातें बतायी गयी हैं। मुसलमानों को अल्लाह तआला ने अल-हम्दु लिल्लाह! इस बड़ी आफत और बुराई से बचा रखा है कि हम सूअर का गोश्त नहीं खाते बल्कि अल्लाह ने हमें इससे बचाया है। और हमारे लिए हलाल तरीक़े से गाय, बैल, बछड़ा, बकरा, दुम्बा, ऊँट इन सब चीज़ों को हलाल क़रार दिया है।
अज़ीज़ दोस्तों, ईदुल अज़्हा इंतिहाई क़रीब है, अलबत्ता इस मर्तबा ईदुल अज़्हा वैसी नहीं होगी जैसे पहले मनायी जाती रही है लेकिन आपसे ये जानना चाहते हैं कि आप इस ईदुल अज़्हा पर क्या नेक काम करने का इरादा रखते हैं, क्या आप गोश्त तक़सीम करके दूसरों की मदद करेंगे, या फिर आप किसी और तरीक़े से दूसरों की मदद करना चाहते हैं या फिर दोनों तरीक़ों से।
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