Special Instructions : औलाद की परवरिश के सम्बन्ध में 30 उपदेश : For Children

Special Instructions : बिस्मिल्लिाहिर्रहमानिर्रहीम, अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रकातुहू! मेरे प्रिय दोस्तों, इस पोस्ट में औलाद की परवरिश के सम्बन्ध में विशेष उपदेश Special Instructions दिये गये हैं इन Special Instructions को जानना एवं इनका पालन करना आपके लिए अत्यन्त आवश्यक है यदि आप इस पोस्ट में दिये गये Special Instructions का सही प्रकार पालन करते हैं तो यक़ीनन आप अपनी औलाद को एक नेक और आदर्श इंसान बना सकते हैं और समाज में अपनी इज़्ज़त बना सकते हैं। परन्तु आप इन Special Instructions का पालन नहीं करते हैं तो फिर समझ लो कि आपकी औलाद आपके हाथ से निकल गयी, जिसके बाद आपको पछतावे के अलावा और कुछ भी हासिल नहीं होगा। अतः आप सभी से गुज़ारिश है कि नीचे दिये गये Special Instructions का ध्यानपूर्वक अध्ययन अवश्य करें और Special Instructions को दूसरों तक भी पहुंचाने में हमारी मदद करें, ईश्वर हम सभी का भला करे, और हम सभी की औलाद को नेक बनाए, आमीन! अब आपकी खि़दमत में पेश है: औलाद की परवरिश के सम्बन्ध में विशेष उपदेश Special instructions regarding the upbringing of children
- औरतों में आदत होती है कि बच्चों को जिन भूत और दूसरी डरावनी चीज़ों से डराती हैं ये बहुत ही ग़लत बात है इससे बच्चे का दिल कमज़ोर हो जाता है। लिहाज़ा ऐसा हरगिज़ न करें।
- माँ को चाहिए कि बच्चे को बाप से डराती रहे।
- अगर लड़का हो तो उसके सर पर बाल मत बढ़ाओ और अगर लड़की है तो जब तक पर्दे में बैठने के क़ाबिल ना हो जाए ज़ेवर मत पहनाओ। इससे एक तो जान का ख़तरा रहता है और दूसरी बात कि बचपन से ही ज़ेवर को शौक़ दिल में होना अच्छी बात नहीं।
- बच्चों के हाथ से ग़रीबों को खाना, कपड़ा, रूपया पैसा आदि चीज़ें दिलवाया करो। और इसी तरह अपने बच्चों से खाने पीने की चीज़ें उनके भाई बहिनों को या और बच्चों को बांटने के लिए कहा करो ताकि बच्चों में सख़ावत (उदारता) की आदत हो जाये।
- बच्चों को ज़्यादा खाने से रोका करो और अधिक खाने की बुराई बच्चों के सामने किया करो परन्तु किसी का नाम लेकर नहीं कि फलां बहुत खाता है बल्कि इस तरह कहा करो कि जो ज़्यादा खाते हैं लोग उसे हब्शी या बैल वग़ैरह कहते हैं।
- अगर लड़का है तो सफेद कपड़े की रग़बत (इच्छा) उसके दिल में पैदा करो और रंगीन लिबास की तरफ उसकी इच्छा ना बढ़ाओ और उसे ये बताया करो कि रंगीन कपड़े लड़कियां पहनती हैं तुम से माशा अल्लाह मर्द हो, हमेशा उसके सामने ऐसी ही बातें किया करो।
- अगर लड़की है तो बहुत छोटे और बहुत तकल्लुफ़ (अनौपचारिक) एवं वासनात्मक कपड़ों की उसे आदत मत डालो। अन्यथा आपको इसका बहुत बुरा अंजाम भुगतना पड़ सकता है।
- बच्चों की हर ज़िद पूरी मत करा, इससे बच्चे का मिज़ाज बिगड़ जाता है।
- बच्चों को गुस्सा करने और चिल्लाकर बोलने से रोको, विशेष रूप से अगर लड़की है तो ग़ुस्सा करने और चिल्लाने पर ख़ूब डांटो, वरना बड़ी होकर पुख़्ता आदत हो जायेगी।
- जिन बच्चों की आदतें ख़राब हैं या पढ़ने लिखने से भागते हैं, या गाली गलोच करते हैं, या नशीले पदार्थ जैसे तम्बाकू, गुटका, बीड़ी सिगरेट आदि का सेवन करते हैं तो ऐसे बच्चों के साथ बैठने, खेलने से रोको और उनकी सोहबत से हमेशा दूर रखा करो।
- इन बातों से नफ़रत दिलाते रहो- ग़ुस्सा, झूठ बोलना, किसी को देखकर जलना या हिर्स करना, चोरी करना, चुग़ली खाना, बे फ़ायदा और फ़िज़ूल की बातें करना, बे बात हंसना या ज़्यादा हंसना हंसाना, धोका देना, बुरी बात करना और बुरी बातें सोचना आदि। और जब उपरोक्त बातों में के कोई बात उनमें हो जाए तो फौरन बच्चे को रोको उसके नुक़सान से आगाह कर दो, ताकि बच्चे उपरोक्त बुरी बातों से बचे रहें।
- अगर बच्चे कोई चीज़ तोड़-फोड़ दे या किसी को मार बैठे तो बच्चे को मुनासिब सज़ा दो ताकि फिर ऐसा ना करे। ऐसी बातों में प्यार दुलार बच्चों को खो देता है।
- बच्चों को सुबह देर तक मत सोने दो, और जल्दी उठने की आदत डालो।
- बच्चों को फ़िज़ूल और बे मतलब की कहानियां हरगिज़ मत सुनाया करो बल्कि उन्हें नेक लोगों की हिकायतें, नबियों, रसूलों और सबाहा-ए-किराम के वाक़ियात सुनाया करो।
- बच्चों को सोने, जागने, खाने पीने, बात चीत वग़ैरा के इस्लामी आदाब सिखाया करो और उन्हें दुआऐं याद कराया करो।
- जब बच्चा सात वर्ष का हो जाये तो नमाज़ की आदत डालो, जब मकतब में जाने के क़ाबिल हो जाए तो अव्वल क़ुरआन मजीद पढ़ाओ, और जब बच्चा दस वर्ष का हो जाए तो नमाज़ न पढ़ने पर उसे मारो ताकि वो नमाज़ का आदी हो जाए।
- बच्चों को ऐसी किताबें मत देखने दो जिन में आशिक़ी माशूक़ी की बातें हों या बेहूदा क़िस्से और ग़ज़लें वग़ैरा हों।
- बच्चों के लिए इस्लामी क़िस्से कहानियों की किताबें अपने घर पर लाकर रखें उनको पढ़ने का शौक़ बच्चों में पैदा करें।
- मकतब/स्कूल से आने के बाद बच्चों को कुछ देर खेलने दो ताकि उनका दिल बहल जाए और तबीयत अच्छी हो जाए, लेकिन खेल ऐसा हो जिसमें कोई गुनाह ना हो और चोट लगने की संभावना ना हो।
- आतिश बाज़ी, बाजा या फ़िज़ूल चीज़ें ख़रीदने के लिए पैसे मत दो और खेल तमाशे दिखाने की आदत मत डालो।
- बच्चों के लिए मोबाइल का इस्तेमाल काफी नुक़सान देह है लिहाज़ा बच्चों को हर संभव मोबाइल से दूर रखो और अगर कुछ देर मोबाइल का इस्तेमाल करते भी हैं तो उसमें इस्लामी और नसीहत वाली कहानियों को देखने और सुनने के लिए कहो, मोबाइल में गेम्स वग़ैरा हरगिज़ मत खेलने दो वरना उनका दिमाग़ कमज़ोर हो जाएगा, बच्चों की सेहत पर भी भारी असर पड़ेगा एवं बच्चों में पागलपन का दौरा की बीमारी भी होने की संभावना ज़्यादा बढ़ जाती है।
- औलाद को ज़रूर कोई ऐसा हुनर सिखला दो जिससे ज़रूरत और मुसीबत के वक़्त चार पैसे हासिल करके अपना और अपने बच्चों को गुज़ारा कर सके।
- लड़कियों को कम से कम इतना पढ़ना लिखना ज़रूर सिखाओ जिससे ज़रूरी कागज़ात वग़ैरा पढ़ सकें और घर का हिसाब किताब रख सकें।
- बच्चों को आदल डालो कि बच्चे अपना काम स्वयं अपने हाथ से करें, अपाहिज और सुस्त मत बनाओ। रात को सोने के लिए बिस्तर ख़ुद उन्हीें से बिछवाऐं और जब सुबह सोकर उठें तो बिस्तर की तह करके अहतियात से रखने दें।
- जब बच्चे से कोई अच्छी बात ज़ाहिर हो तो उसे शाबाशी ज़रूर दें, उन्हें प्यार करें और कुछ इनाम भी दें ताकि उसका हौसला बुलंद हो। और जब कोई बुरी बात देखो तो बच्चे को तन्हाई में समझाओ कि देखो अच्छे नेक लोग ऐसा नहीं करते और ऐसा बुरा करने वाले को लोग बुरा जानते हैं। फिर भी अगर बच्चा दोबारा ग़लत काम दोहराए तो बच्चे को मुनासिब सज़ा दो ताकि फिर से उस बुरे काम को ना दोहराए।
- बच्चे को कोई भी काम छुपाकर न करने दो, चाहे खेल हो या खाना पीना हो और और कोई काम हो।
- कोई मेहनत को काम उसके ज़िम्मे दे दो जिससे सहत और हिम्मत बनी रहे जिससे बच्चे में सुस्ती और काहिली ना आने पावे।
- बच्चों को चलने में ताकीद करो कि बहुत जल्दी ना चलें और चलते वक़्त निगाह नीची रखें, निगाह ऊपर उठाकर ना चलें।
- बच्चों को आज्ज़ी (विनम्रता) इख़्तियार करने की आदत डालो, ज़बान से, चाल से, और बरताओ से, शेखि़यां मारने से बचाओ।
- बच्चों को कुछ पैसे दिया करो कि अपनी इच्छानुसार ख़र्च किया करें परन्तु उसको ये आदत डालो कि वो कुछ भी आपसे छुपाकर ना ख़रीदें ताकि बच्चे ख़ुद से हिसाब किताब लगाना सीख जाऐं।