Religious Rights of Women : औरतों के धार्मिक अधिकार


अजीज बाईयों और बहिनों, अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रकातुहू. दीन-ए-इस्लाम में औरतों को जो मकाम व मर्तबवा हासिल है वो किसी और धर्म ने नहीं है. दीन ए-इस्लाम ने औरतों को कई अधिकारों (हुकूक) से नवाजा है जिसमें से एक अहम हक के बारे में समझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि हम और आप औरतों के धार्मिक (दीनी) हुकूक को अच्छी तरह समझ लें और अमली जामा पहनाने की कोशिश कर सकें. नेक आमाल का सवाब पाने के ऐतिबार से मर्द और औरतें एक समान दर्जा रखते हैं जैसा कि अल्लाह तआला ने कुरआन में सूरह निसा की आयत नं0 32 में इरशाद फरमाया है-

“मर्दों के लिए हिस्सा है अपने आमाल का और औरतों के लिए हिस्सा (सवाब) है अपने आमाल का”

लिहाजा किसी औरत के सवाब में इस दर्जे से अल्लाह अताला कमी नहीं करेगा कि वह औरत है और किसी मर्द का सवाब इसलिए नहीं बढ़ाया जाएगा कि वह मर्द है. जैसा कि सूरह निसा का आयत नं0 424 में अल्लाह तआला का इरशाद है-

“और जो नेक आमाल करेगा चाहे मर्द हो या औरत बशर्ते कि वह मोमिन हो, तो ऐसे लोग जन्नत में दाखिल किए जाएंगे और खजूर की गुठली के शिगाफ के बराबर भी उनका हक नहीं मारा जाएगा”

इसी लिए हम कहते हैं कि अल्लाह के यहां नेका आमाल का सवाब न औरत का बर्बाद होता है न मर्द का बल्कि दोनों के लिए एक जैसा सवाब मुकर्रर कर दिया गया है. इसी तरह से सूरह आले इमरान की आयत नं0 495 में ईमान वालों की दुआ के जवाब में अल्लाह तआला ने इरशाद फरमाया-

“मैं तुममें से किसी का अमल बर्बाद करने वाला नहीं हूँ चाहे मर्द हो या औरत, तुम सब एक दूसरे की जिंस से हो तो जिन लोगों ने मेरी खातिर हिजरत की, अपने घरों से निकाले गए और यातना दिए गए (कुफ़्फार को) कत्ल किया और (कुफ़्फार के हाथों) कत्ल हुए मैं उनके गुनाह माफ कर दूंगा और उन्हें ऐसे बागों में दाखिल करूंगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं यह है उनका सवाब अल्लाह की तरफ से और अल्लाह के पास तो बड़ा अच्छा सवाब है”

ऊपर दी गईं तमाम मिसालों से हमें मालूम पड़ गया कि जिस तरह अल्लाह ने मर्दों के लिए उनके नेक आमाल का बदला रखा है उसी तरह औरतों के लिए भी नेक आमाल का बदला रखा है, लिहाजा हम अपनी तमाम माँ-बहिनों से गुजारिश करते हैं कि अल्लाह की राह में ज़्यादा से ज़्यादा नेक आमाल करती रहें क्यों कि यही औरतों के दीनी हुकूक हैं अगर आप दीनी हुकूक को पाबंदी से अदा करती रहेंगीं तो इन शा अल्लाह आपको इसका बहुत बड़ा सवाब अता फरमाएगा. धार्मिक (दीनी हुकूक) में एक बहुत ही अहम फरीजे का जिक्र और कर देना मुनासिब समझता हूँ, इस पर आप जरूर गौर फरमाएं, और वो है अम्र बिल मारूफ्‌ और नह्य अनिल मुनकर (भलाई का हुक्म देना और बुराई से नोकना). ये बहुत ही पाक फरीज़ा जिस तरह मर्दों पर फर्ज है उसी तरह आप औरतों पर भी फर्ज है और इसका सवाब दोनों के लिए एक जैसा है, जैसा कि अल्लाह तआला ने सूरह तौबा की आयत नं0 74-72 में इदशाद फरमाया है-

“मोमिन मर्द और मोमिन औरतें सब एक दूसरे के साथी हैं भलाई का हुक्म देते हैं, और बुराई से रोकते हैं, नमाज़ कायम करते हैं, जकात अदा करते हैं, अल्लाह और उसके रसूल की बात मानते हैं यही लोग हैं जिन पर अल्लाह तआला बहुत जल्द रहम फरमाएगा बेशक अल्लाह तआला ग़ालिब और हिकमत वाला है। उन मोमिन मर्दों और औरतों से अल्लाह ने उन जन्‍नतों का वादा फरमाया है जिनके नीचे नहरें बहती हैं वे उनमें हमेशा-हमेशा रहेंगें और पाकीजा और साफ सुथरे महलों का, जो उन हमेशगी वाली जननतों में हैं, और अल्लाह की रजा मंदी सबसे बड़ी चीज है और यही जबर्दस्त कामयाबी है”

चुनांचे हमने ये भी जान लिया कि अल्लाह की रज़ामंदी हासिल करने के लिए अम्र बिल मारूफ्‌ और नह्य अनिल मुनकर (यानी नेकी का हुक्म देना और बुराई से रोकना) बहुत जरूरी है, अतः ये सब औरतों के धार्मिक (दीनी) हुकूक हैं जिनको अदा करना आपकी बड़ी ज़िम्मेदारी है. अल्लाह तआला हम सभी को अमल की तौफीक अता फरमाए, आमीन!