Rights of Relatives : रिश्तेदारों के हुकूक (अधिकार)



Rights of Relatives: मुसलमान भाईयों और बहिनों, अस्सलामु अलैकुम व रह मतुल्लाहि व ब रकातुहू! जिस तरह अल्लाह तआला ने लोगों के हुकूक अदा करने का हुक्म दिया है उसी में से एक बहुत अहम हक रिश्तेदारों के हुकूक अदा करना है और करीबी रिश्तेदारों की आर्थिक मदद करना है जो बहुत बड़ी नेकी है जैसा कि सूरह निसा की आयत नं0 36 में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने रिश्तेदारों के साथ भलाई (उपकार) करने के बारे में हुक्म इरशाद फ़रमाया है कि "और अल्लाह तआला की इबादत करो और उसके साथ किसी को शरीक न करो और मां बाप के साथ सुलूक व अहसान करो और रिश्तेदारों के साथ, यतीमों और मिस्कीनों के साथ, रिश्तेदार पड़ौसी और अजनबी पड़ौसी के साथ, साथी के साथ और मुसाफ़िर के साथ और अपनी लौंडी गुलामों के साथ, यकीनन अल्लाह तआला तकब्बुर करने वाले और शेखी खोरों को पसंद नहीं करता।" Rights of Relatives रिश्तेदारों के हुकूक, Rights of Relatives, Rights of Relatives, Rights of Relatives

चुनांचे इस आयत से हमें मालूम पड़ता है कि रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, ये अल्लाह तआला का हुक्म है। और रिश्तेदारों (Relatives) के हुकूक (अधिकार) अदा करने से अल्लाह तआला खुश होता है जैसा कि सूरह रूम की आयत नं0 38 में अल्लाह तआला ने इरशाद फरमाया है कि

“पस रिश्तेदारों, मिस्कीनों और मुसाफिरों को उनका हक अदा करो। ये उनके लिए बेहतर है जो अल्लाह तआला का मुंह देखना चाहते हों यही लोग कामयाब होने वाले हैं।”

रिश्तेदारों (Relatives) के साथ भलाई (उपकार) और अच्छा व्यवहार करने का मतलब ये है कि रिश्तेदार अगर आर्थिक सहयोग के मोहताज हों तो उनको आर्थिक सहयोग करना चाहिए अगर आर्थिक सहयोग के मोहताज न हों तो उनकी गमी व खुशी में शरीक होना, उनकी खैर व आफियत मालूम करना, उनसे मेलजोल रखना भी उनके हुकूक में शामिल है जिसे अदा करने का हुक्म है।

इसी तरह से जो लोग रिश्तेदारों के हुकूक अदा नहीं करते हैं ज़रूरत के वक्त उनके काम नहीं आते हैं उनके गमी व खुशी में शरीक नहीं होते हैं तो अल्लाह तआला उनसे सख़्त नाराज़ रहता है और कयामत के दिन वे लोग घाटा उठाने वालों में से होंगे जैसा कि सूरह बकरा की आयत नं0 27 में अल्लाह तआला का इरशाद है कि “वे लोग जो अल्लाह तआला से पक्का वादा करने के बाद उसे तोड़ डालते हैं और जिस चीज को अल्लाह तआला ने मिलाने का हुक्म दिया है उसे काटते हैं और जमीन में फ़साद फैलाते हैं, वही लो घाटा पाने वाले हैं।” इस बात को भी आप अच्छी तरह से जान लें कि रिश्तेदारों में सबसे पहले सगी बहन भाई और उसके बाद दर्जा बदर्जा तमाम रिश्तेदार शामिल हैं। लिहाज़ा हर तरीके से हमें अपने रिश्तेदारों के हुकूक अदा करते रहना चाहिए ताकि अल्लह तआला हमसे राज़ी हो जाए और इस अमल को जहन्नम से निजात और जन्नत में दाखिले का ज़रिया बनाए । आख़िर में अल्लाह तआला से दुआ है कि वो हम सभी को सही तरह से रिश्तेदारों के हुकूक अदा करने की तौफ़िीक़ अता फरमाएं, आमीन!

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Ad Code